ईरान की नई चाल से मचेगा हाहाकार, समुद्र में फिर घेराबंदी की तैयारी, आसमान छुएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम!

International News: वैश्विक महाशक्तियों के बीच शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। हाल ही में आई ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष खत्म होने और शांति वार्ता की खबरें बेअसर साबित हो रही हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक यह शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो चुकी है और ईरान एक बार फिर बेहद नाराज है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर बंद कर सकता है ईरान

शांति वार्ता टूटने के बाद अब यह आशंका तेजी से गहराने लगी है कि ईरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह अवरुद्ध कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की भारी किल्लत पैदा होने की पूरी संभावना है।

सीएनएन (CNN) की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान जब चाहे अपनी इच्छानुसार होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह ब्लॉक करने की सैन्य क्षमता रखता है। हालिया तनाव और सैन्य गतिविधियों के बाद इस पूरे समुद्री क्षेत्र में शक्ति संतुलन बहुत तेजी से बदला है।

परमाणु हथियार से भी ज्यादा घातक साबित हो रही है यह घेराबंदी

ईरान ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले इस रूट पर अपना दबदबा काफी मजबूत कर लिया है। एक अमेरिकी आधिकारिक सूत्र ने सीएनएन को बताया कि ईरान का अब इस पूरे जलमार्ग पर वास्तविक नियंत्रण स्थापित हो चुका है, जो किसी परमाणु हथियार से भी अधिक शक्तिशाली और खतरनाक है।

इस सनसनीखेज खबर के बाहर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार और आम जनता के बीच गहरी चिंता और तनाव का माहौल बन गया है। यदि ईरान ने इस जलमार्ग को रोका, तो कच्चे तेल की जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाएगी, जिसका सीधा असर हर आम और खास इंसान की जेब पर पड़ना तय है।

महंगाई का लगेगा बड़ा झटका, बढ़ेंगे ईंधन के दाम

पिछले महीने ही देश के भीतर लगातार चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिससे आम जनता पहले से ही काफी परेशान है। अब यदि होर्मुज संकट दोबारा खड़ा होता है, तो ईंधन के साथ-साथ घरेलू और कमर्शियल गैस की भी भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे देश में महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है।

कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की यह खबर निश्चित रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के लिए बेहद अप्रिय है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस नाकेबंदी को लेकर अभी तक कोई ठोस आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, बल्कि ये तमाम दावे खुफिया रिपोर्टों और मौजूदा हालातों पर आधारित हैं।

Author: Pallavi Sharma

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