World News: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी तनाव आखिरकार एक ऐतिहासिक शांति समझौते के साथ खत्म हो गया है. पाकिस्तान और कतर की सफल मध्यस्थता से हुई इस बड़ी डील की पुष्टि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की है. इस फैसले से वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा.
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते का सबसे सीधा और सकारात्मक असर भारत पर पड़ने की पूरी उम्मीद है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक ऐलान किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा. इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना जहाजों की आवाजाही पर लगाई गई अपनी सख्त नाकेबंदी को तुरंत पूरी तरह हटा लेगी.
होर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ेगी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान के साथ डील अब पूरी हो चुकी है. मैं होर्मुज को पूरी तरह टोल फ्री खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने का आदेश देता हूं. दुनिया के कमर्शियल जहाज अब फिर से बिना किसी डर के चल सकते हैं.
पूरी दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी सप्लाई का लगभग 20 फीसदी हिस्सा अकेले इसी महत्वपूर्ण होर्मुज रूट से होकर गुजरता है. दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति के कारण इस समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों का आना-जाना पूरी तरह ठप हो गया था, जिससे संकट गहराया था.
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 से 85 फीसदी कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है. इस आयात में मिडिल ईस्ट के देशों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी क्रूड ऑयल बाजार में आने से ब्रेंट क्रूड की कीमतें काफी नीचे आ जाएंगी.
सस्ता ईरानी क्रूड ऑयल मिलने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम पर दबाव बहुत कम हो जाएगा. इससे देश में बढ़ती महंगाई को काबू में रखने में बड़ी मदद मिलेगी. इसके अलावा भारत का कुल तेल आयात बिल घटेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा.
इस डील के ड्राफ्ट के मुताबिक ईरान के तेल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों में अस्थाई छूट दी जाएगी. इसके साथ ही अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई 25 अरब डॉलर की भारी-भरकम संपत्ति को भी तुरंत जारी करने के लिए पूरी तरह राजी हो गया है.
भारत पहले ईरान से बहुत बड़ी मात्रा में बेहद सस्ता कच्चा तेल खरीदता था. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों के बीच यह व्यापारिक रिश्ता पूरी तरह बंद हो गया था. खास बात यह थी कि ईरान से तेल का पूरा व्यापार डॉलर के बजाय सीधे रुपये में होता था.
चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट और व्यापारिक गलियारे को मिलेगी नई रफ्तार
इस ऐतिहासिक शांति समझौते का दूसरा सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा भारत के महत्वाकांक्षी चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को मिलेगा. भारत ने ईरान के इस रणनीतिक बंदरगाह में बहुत बड़ा निवेश किया है. यह प्रोजेक्ट भारत को सीधे अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट के देशों तक सीधी पहुंच प्रदान करता है.
अमेरिका और ईरान के रिश्तों में आई इस कड़वाहट के खत्म होने से चाबहार प्रोजेक्ट पर बना अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा. इससे भारत को इस बंदरगाह के विस्तार, नए निवेश और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के काम को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी.
Author: Pallavi Sharma


