Himachal Pradesh News: राज्य सरकार ने पहाड़ी प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब प्रदेश में मौसम का हाल केवल जिला या ब्लॉक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार हर गांव को इस हाईटेक सुविधा से जोड़ने जा रही है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी विंड्स योजना के तहत राज्य की सभी 3,758 ग्राम पंचायतों में आधुनिक ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। लगभग 72 करोड़ रुपये की भारी बजट लागत से लागू होने वाली यह अनूठी योजना ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए एक सुरक्षा कवच बनेगी।
इस नई व्यवस्था से स्थानीय किसानों, बागवानों और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को सीधा और बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत सभी पंचायतों से जुड़े सरकारी सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूल परिसरों में ये आधुनिक मशीनें बहुत ही मजबूती से स्थापित की जाएंगी।
तापमान और ओलावृष्टि का तुरंत मिलेगा सटीक लाइव डेटा
ये डिजिटल स्टेशन स्थानीय स्तर पर मौसम की पल-पल की गतिविधियों पर पूरी तरह से नजर रखेंगे। ये आधुनिक यंत्र वास्तविक समय में न्यूनतम और अधिकतम तापमान, भारी वर्षा, हवा की गति, आर्द्रता और ओलावृष्टि समेत अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े रिकॉर्ड करने में सक्षम हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम बहुत ही अप्रत्याशित तरीके से तेजी से बदलता है। कई बार एक ही जिले की दो अलग-अलग घाटियों में मौसमी परिस्थितियां एकदम भिन्न होती हैं। अब पंचायत स्तर पर लाइव डेटा मिलने से पूर्वानुमान बहुत ज्यादा सटीक हो जाएगा।
समय रहते मौसम में आने वाले भयंकर बदलावों की एडवांस जानकारी मिलने से किसान अपनी नकदी फसलों को सुरक्षित रख सकेंगे। वे असामयिक आपदा से फसलों को बचाने के लिए जरूरी इंतजाम पहले ही कर लेंगे। इससे कृषि क्षेत्र में होने वाले सालाना नुकसान में भारी कमी आएगी।
सेब और कीवी उत्पादकों को मिलेगा एडवांस अलर्ट सुरक्षा कवच
गौरतलब है कि हिमाचल में सेब, कीवी, चेरी और प्लम जैसे महंगे फलों की बागवानी बहुत बड़े पैमाने पर की जाती है। अचानक होने वाली भारी ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान से बागवानों को हर साल करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे उनकी कमर टूट जाती है।
यह नई एडवांस प्रणाली बागवानी को अधिक वैज्ञानिक, आधुनिक और सुरक्षित बनाने में एक मील का पत्थर साबित होगी। योजना का दूसरा सबसे खूबसूरत पहलू स्कूली शिक्षा के विकास से जुड़ा है। वेदर स्टेशन परिसरों में लगने से छात्र विज्ञान को और करीब से समझ सकेंगे।
स्कूली विद्यार्थियों को इसके माध्यम से मौसम विज्ञान और पर्यावरण से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण व्यावहारिक जानकारी आसानी से मिल सकेगी। छात्र आधुनिक कंप्यूटर तकनीक और डेटा संग्रहण की पूरी प्रक्रिया को लाइव देखेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान शिक्षा को एक नया डिजिटल आयाम मिलेगा।
मार्च तक पूरा होगा काम, सचिव ने दी विस्तृत जानकारी
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन वेदर स्टेशनों को स्थापित करने का मुख्य जिम्मा गुजरात और कानपुर की दो नामी विशेषज्ञ कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया के जरिए दिया गया है। कंपनियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ यह कार्य हर हाल में पूरा करना होगा।
प्रशासन ने सभी पंचायतों में आगामी मार्च महीने तक इन स्टेशनों को पूरी तरह क्रियाशील करने का कड़ा लक्ष्य रखा है। सफल संचालन की जांच के बाद ही केंद्र सरकार द्वारा कंपनियों को भुगतान किया जाएगा। सरकार इस प्रोजेक्ट की हर हफ्ते खुद समीक्षा कर रही है।
कृषि एवं बागवानी विभाग के सचिव सी. पाल रासु ने बताया कि यह डिजिटल व्यवस्था भविष्य में एक बड़ा गेम चेंजर साबित होगी। यह कृषि क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर बनेगी। इसके आंकड़े किसानों को मौसम आधारित सही और सटीक निर्णय लेने में पूरी मदद करेंगे।
Reported By: Sunita Gupta


