अमेरिकी सेना के मिसाइल हमले में लापता तीनों भारतीय नाविकों के शव बरामद, दिल्ली ने वाशिंगटन के सामने दर्ज कराया कड़ा विरोध

Oman News: ओमान की खाड़ी में एक कमर्शियल तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले के बाद लापता तीनों भारतीय नाविकों के शव बरामद कर लिए गए हैं। केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को इस बेहद दुखद खबर की आधिकारिक पुष्टि की है।

इस भीषण हमले के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जेसन मीक्स को तुरंत तलब किया। विदेश मंत्रालय ने इस हिंसक घटना पर अपना बेहद कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस सैन्य कार्रवाई से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में भारी तनाव आ गया है।

शोक संतप्त परिवारों को हर संभव मदद देगी केंद्र सरकार

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि पलाऊ के झंडे वाले एमटी सेटेबेलो शिप पर हुई इस दुखद घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। पहले लापता बताए गए तीनों भारतीय नाविकों के शव अब पूरी तरह बरामद कर लिए गए हैं।

मंत्री सोनोवाल ने आगे कहा कि यह क्षति हमारे देश के लिए पूरी तरह अपूर्णीय है। इस बेहद मुश्किल समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार शोक संतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। सरकार मृतकों के पीड़ित परिजनों को हर संभव मदद मुहैया कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

शिपिंग मंत्रालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सुरक्षित बचाए गए चालक दल के सदस्यों की तत्काल वतन वापसी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही दिवंगत नाविकों के पार्थिव शरीर को उनके अंतिम संस्कार के लिए जल्द से जल्द हवाई मार्ग से भारत लाया जाएगा।

मृतकों में उत्तर प्रदेश के देवरिया का युवा नाविक भी शामिल

फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि मृतकों की आधिकारिक पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है। मृत नाविक शिवानंद चौरसिया उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मूल निवासी थे।

इसके अलावा चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश को पहले लापता बताया जा रहा था, लेकिन अब उनका पार्थिव शरीर भी खोजकर्ताओं ने बरामद कर लिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को हुए इस घातक हमले की खुलकर और बेहद तीखे शब्दों में निंदा की है।

भारत में अमेरिका के मुख्य राजदूत सर्जियो गोर इस समय कज़ाखस्तान की आधिकारिक यात्रा पर थे। इसी वजह से भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख को तलब किया। तेल टैंकर सेटेबेलो पर मौजूद 21 अन्य भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सटीक हथियारों से हमले की बात स्वीकारी

यह कमर्शियल जहाज अमेरिकी सेना की ओर से दागे गए घातक प्रिसिजन म्यूनिशन्स की सीधी चपेट में आया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि इस तेल टैंकर ने ईरान से कच्चा तेल ले जाते हुए जारी अंतरराष्ट्रीय नाकाबंदी का जानबूझकर उल्लंघन किया था।

अमेरिकी सेना के अनुसार बार-बार रेडियो चेतावनी देने के बावजूद जहाज के चालक दल ने उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया। इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमान ने मर्चेंट शिप के मुख्य इंजन रूम को निशाना बनाते हुए अपने बेहद सटीक और आधुनिक हथियारों से हमला कर दिया।

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली हमलों से बढ़ा भयंकर तनाव

यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब केवल दो दिन पहले ही अमेरिकी बलों ने एक अन्य तेल टैंकर मैरीवेक्स को निशाना बनाया था। उसमें सवार 24 भारतीय नाविकों को ओमान की नौसेना ने सुरक्षित निकाला था। अमेरिका इन दोनों जहाजों पर पहले ही कड़े प्रतिबंध लगा चुका था।

यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हो गई थी। इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरसाईं।

वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा यह भीषण युद्ध अब तेजी से पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि ईरान शांति समझौते में बहुत ज्यादा समय ले रहा है। इस तनाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुद्री मार्ग पूरी तरह असुरक्षित हो गए हैं।

Author: Pallavi Sharma

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