World News: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक कूटनीति का दोहरा चेहरा सामने आया है। अमेरिका ने फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर चीन और पाकिस्तान के एक बड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस कूटनीतिक टकराव से वैश्विक मंच पर भारी हलचल मच गई है।
अमेरिका ने चीन और पाकिस्तान का प्रस्ताव किया खारिज
पाकिस्तान और चीन ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को ग्लोबल आतंकी संगठन घोषित करने की मांग की थी। दोनों देशों ने यूएनएससी की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के तहत ब्लैकलिस्टिंग की याचिका दी थी। लेकिन अमेरिका ने इस साझा प्रस्ताव पर अपना वीटो पावर इस्तेमाल कर दिया।
सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य पाकिस्तान के प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने अपनी दलीलें पेश की थीं। उन्होंने कहा था कि ये दोनों आतंकी संगठन पड़ोसी देश अफगानिस्तान की धरती से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। हालांकि, पश्चिमी देशों ने इस दलील को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
अतीत में चीन भी लगा चुका है कूटनीतिक होल्ड
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने खुद 2019 में बीएलए को अपनी फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन लिस्ट में शामिल किया था। इसके बावजूद वैश्विक कूटनीति के मंच पर इस प्रस्ताव को रोकना एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। महाशक्तियां अक्सर अपने हितों के अनुसार फैसले लेती हैं।
यह वही चीन है जिसने अतीत में भारत और अमेरिका के प्रस्तावों पर कई बार ‘टेक्निकल होल्ड’ लगाया था। भारत ने जब पाकिस्तानी आतंकियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की थी, तब चीन ने रोड़े अटकाए थे। अब अमेरिका और उसके सहयोगियों ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया है।
आतंकी हमलों से दहल चुका है पाकिस्तान का क्षेत्र
हाल के दिनों में कराची एयरपोर्ट, ग्वादर पोर्ट और जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के हाईजैकिंग जैसे बड़े हमलों में इस संगठन का हाथ रहा है। बलूचिस्तान में बढ़ते इन हमलों के कारण पाकिस्तान और चीन के प्रोजेक्ट्स पर लगातार बड़ा सुरक्षा संकट मंडरा रहा है।
पाकिस्तान इस समय सुरक्षा परिषद में महत्वपूर्ण कमेटियों की कप्तानी का फायदा उठाना चाहता था। वह तालिबान प्रतिबंध समिति और आतंकवाद विरोधी समिति में अपने पद का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन अमेरिकी वीटो ने इस्लामाबाद और बीजिंग की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है।
Author: Pallavi Sharma


