साइबर सिटी में मातम: हंसते-खेलते परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, एक ही हफ्ते में उजड़ गया पूरा आशियाना!

Business News: गुरुग्राम के सेक्टर-46 से एक बेहद भावुक और आंखें नम कर देने वाली खबर सामने आई है। एक हफ्ते पहले तक जो घर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की किलकारियों से पूरी तरह चहकता था, वह आज पूरी तरह वीरान हो चुका है। परिवार के सभी छह सदस्य एक सप्ताह के भीतर दुनिया छोड़ गए।

मिलनसार स्वभाव से जीती थी सबका दिल

दो साल पहले राधेश्याम अग्रवाल का यह प्यारा परिवार दिल्ली के कोटला इलाके से आकर सेक्टर-46 में रहने लगा था। अपनी बेहद मिलनसार और धार्मिक प्रवृत्ति के कारण कुछ ही समय में इस परिवार के सभी सदस्यों ने सेक्टर के लोगों के दिलों में एक बहुत ही खास जगह बना ली थी।

राधेश्याम अग्रवाल रोजाना पार्क में जाते थे और वहां बुजुर्गों व बच्चों से खूब बातें करते थे। उनके बेटे सीए विवेक अग्रवाल एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। विवेक तमाम सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और सामाजिक संगठनों को हमेशा अपनी नि:शुल्क सेवाएं प्रदान करते थे।

अस्पताल से आने के बाद होनी थी शादी की सालगिरह

पड़ोसियों का कहना है कि उन्होंने कभी भी इस अग्रवाल परिवार के किसी भी सदस्य के चेहरे पर उदासी की एक भी शिकन नहीं देखी थी। सभी हर पल मुस्कुराते रहते थे। घर में राधेश्याम अग्रवाल और प्रेमलता अग्रवाल की शादी की 50वीं सालगिरह को लेकर पिछले कई महीनों से जोर-शोर से तैयारियां की जा रही थीं।

सभी को पूरा भरोसा था कि राधेश्याम अग्रवाल अपनी बीमारी से बहुत जल्द पूरी तरह उबर जाएंगे। अस्पताल से उन्हें छुट्टी मिलने के तुरंत बाद घर में एक शानदार छोटी पार्टी का आयोजन होना था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और पूरा परिवार काल के गाल में समा गया।

अवैध गेस्ट हाउस और होटलों को बंद करने की मांग

इस भीषण हादसे के बाद स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। सेवा संघर्ष समिति के प्रधान विनोद ठाकरान का इस पीड़ित परिवार से बहुत गहरा और विशेष जुड़ाव था। उन्होंने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए प्रशासन से कड़े कदम उठाने की जोरदार मांग की है।

ठाकरान का कहना है कि इस बेकसूर परिवार के प्रति सबसे सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि शहर में नियमों के खिलाफ चल रहे सभी अवैध होटल, पीजी और गेस्ट हाउस को तुरंत बंद कराया जाए। साइबर सिटी में मेदांता अस्पताल के आसपास हजारों की संख्या में ऐसे अवैध रिहायशी व्यावसायिक ठिकाने धड़ल्ले से चल रहे हैं।

स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि प्रशासन को इन सभी व्यावसायिक होटलों और गेस्ट हाउस का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराना चाहिए। इस ऑडिट से साफ पता चल सकेगा कि किस संस्थान के पास वैध एनओसी है और किसने नियमों का उल्लंघन कर ज्यादा कमरे बनाए हैं।

Author: Sandeep Hooda

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