2300 करोड़ के क्रिप्टो महाघोटाले पर ईडी का बड़ा एक्शन, जीरकपुर का मशहूर प्रापर्टी डीलर गिरफ्तार, दुबई भागा मुख्य मास्टरमाइंड

Chandigarh News: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2300 करोड़ रुपये के बड़े क्रिप्टो करेंसी घोटाले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पंजाब के जीरकपुर में बड़ी छापेमारी की है। इस दौरान वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े कई अहम साक्ष्य मिले हैं।

जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग और असहयोग के आरोप में प्रापर्टी डीलर विजय जुनेजा के बेटे मासूम जुनेजा को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने तलाशी के दौरान सिंडिकेट के ठिकानों से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। इन्हें कोर्ट में अहम सबूत माना जा रहा है।

हिमाचल और पंजाब पुलिस की एफआईआर से खुली परतें

ईडी ने यह पूरी कार्रवाई हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज शुरुआती मुकदमों के आधार पर शुरू की थी। इस रैकेट का मुख्य सरगना सुभाष शर्मा है। उसने साल 2018 में अपने करीबियों के साथ मिलकर ‘कोर्वियो काइन’ नाम से एक फर्जी डिजिटल करेंसी नेटवर्क बनाया था।

आरोपियों ने इस फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम के प्रचार के लिए देश भर के कई शहरों में लग्जरी सेमिनार आयोजित किए थे। ठगों ने आम लोगों को बहुत कम समय में भारी रिटर्न और फिक्स्ड प्रॉफिट का लालच दिया था। इस तरह उन्होंने करीब 2.48 लाख मासूम लोगों को फंसाया।

पोंजी स्कीम की तरह घूमता था करोड़ों का कैश

यह पूरा नेटवर्क असल में एक पोंजी स्कीम मॉडल पर काम कर रहा था। इसमें नए जुड़े निवेशकों के पैसों से पुराने वाले लोगों को कमीशन बांट दिया जाता था। इस पूरे खेल में सिंडिकेट ने करीब 2300 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड वित्तीय हेरफेर और घोटाला किया है।

भनक लगते ही जालसाजों ने अपने सभी ऑनलाइन डोमेन और सर्वर से जुड़े डिजिटल डेटा को इंटरनेट से पूरी तरह डिलीट कर दिया। इसके बाद मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत दुबई भाग गया। एजेंसी अब उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस पर काम कर रही है।

काले धन से खरीदी बेनामी और महंगी अचल संपत्तियां

जांच में पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी मासूम और उसके पिता ने जनता से मिले कैश का इस्तेमाल महंगी जमीनें और विला खरीदने में किया। इन अचल संपत्तियों की आधिकारिक रजिस्ट्री सरकारी रिकॉर्ड में बहुत कम कीमत पर दिखाई गई थी, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा कैश में दिया गया था।

दोनों शातिर आरोपी अपने दफ्तर के कर्मचारियों और फर्जी नामों पर खुले कई बेनामी बैंक अकाउंट्स को खुद ऑपरेट कर रहे थे। इन खातों का इस्तेमाल पैसे की लेयरिंग यानी फंड ट्रांसफर को इधर-उधर घुमाने के लिए होता था। ईडी अब आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

Reported By: Sunita Gupta

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