ईरान-इजराइल संघर्ष से दहला अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतों में 3% का भारी उछाल

Delhi News: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में एक बार फिर गहराते सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखने लगा है। रविवार देर रात बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। ईरान और इजराइल के बीच हुई ताजा सैन्य कार्रवाई ने तेल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।

दोनों देशों के बीच हुई इस भिड़ंत ने क्षेत्र में लागू नाजुक युद्धविराम (सीजफायर) को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है। निवेशकों को डर है कि यदि यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो सकती है। इसके कारण आने वाले दिनों में दुनिया भर में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

ईरान ने दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, सीजफायर हुआ तार-तार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने रविवार को इजराइल की सीमा के भीतर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अप्रैल 2026 में दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद से यह पहली इतनी बड़ी और सीधी मिसाइल कार्रवाई है। इस हमले के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल भी काफी तेज हो गई है।

ईरान की इस कार्रवाई से ठीक पहले इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हवाई हमला किया था। इजरायली सेना का दावा है कि उसने ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इन लगातार हमलों से क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है।

ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर के पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

इस ताजा सैन्य संघर्ष का असर रविवार देर रात बाजार खुलते ही देखने को मिला, जब कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत का उछाल आया। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी मार्केट मार्कर वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आपूर्ति में लगातार आ रही कमी के कारण ब्रेंट क्रूड पहले ही 126 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम स्तर को छू चुका है। कच्चे तेल में आ रही इस तेजी की वजह से दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ता जा रहा है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्यों बना चिंता का केंद्र?

वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए लाइफलाइन माना जाता है। फरवरी में अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हमलों के बाद से ईरान ने इस मार्ग पर कड़ा नियंत्रण लगा रखा है।

तेल बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले संभावित समझौते के बाद यह रणनीतिक मार्ग पूरी तरह खुल जाएगा। हालांकि, रविवार को हुए मिसाइल हमलों ने इन सभी सकारात्मक उम्मीदों को धराशायी कर दिया है। अब इस जलमार्ग पर सुरक्षा का संकट और ज्यादा गहराने की आशंका है।

पहले क्यों आ रही थी नरमी और अब दुनिया पर क्या होगा असर?

पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका-ईरान वार्ता आगे बढ़ने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद से तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखी जा रही थी। हालांकि, ताजा घटनाक्रम ने शांति समझौते की उम्मीदों को लंबा खींच दिया है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहीं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। इसके अलावा माल ढुलाई और हवाई यात्रा की लागत बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। आर्थिक अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी भारी उतार-चढ़ाव और गिरावट का दौर देखने को मिल सकता है।

Author: Rajesh Kumar

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