Madhya Pradesh News: मॉडल एवं अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद आरोपियों की सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। मामले में नामजद सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह और उनका बेटा समर्थ सिंह दो जून से ही जेल की सलाखों के पीछे हैं। न्यायालय के कड़े आदेश के बाद जेल प्रशासन दोनों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।
जेल प्रशासन ने इन मां-बेटे की सुरक्षा के लिए कुल 12 प्रहरियों को विशेष रूप से तैनात किया है। हालांकि जेल परिसर में पहले से ही 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी रखी जा रही है, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों की बैरकों के आसपास अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे भी स्थापित किए गए हैं। प्रशासन इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
मालूम हो कि बीती 12 मई को कटारा हिल्स क्षेत्र स्थित ससुराल में गिरिबाला सिंह की बहू त्विषा शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। घटना के शुरुआती दिनों में आरोपी समर्थ सिंह को कड़ी और विशेष निगरानी में रखा गया था। हालांकि, शुक्रवार शाम को उन्हें सामान्य बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन उनकी सुरक्षा व्यवस्था में कोई कटौती नहीं की गई है।
समर्थ की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के लिए पांच प्रहरियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। दूसरी तरफ, महिला जेल में बंद पूर्व जज गिरिबाला सिंह की सुरक्षा का जिम्मा सात महिला प्रहरियों को सौंपा गया है। महिला सेल के अस्पताल वार्ड के बाहर और उसके आसपास अतिरिक्त कैमरे लगाकर उनकी हर हरकत पर 24 घंटे नियंत्रण कक्ष से नजर रखी जा रही है।
जेल में बंद हैं पूर्व जज के फैसले से सजा पाए 29 कैदी
जेल अधिकारियों के मुताबिक, गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक सेवा काल के दौरान कई बड़े और चर्चित मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए थे। उनके फैसलों की वजह से सजा काट रहे करीब 60 दोषसिद्ध कैदियों में से 29 कैदी वर्तमान में इसी भोपाल सेंट्रल जेल में ही बंद हैं। यही वजह है कि जेल प्रबंधन उन कैदियों की गतिविधियों पर भी विशेष नजर रख रहा है, ताकि कोई अप्रिय स्थिति न बने।
इस बीच, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम इस हाई-प्रोफाइल मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी फोरेंसिक रिपोर्ट के साथ-साथ त्विषा और समर्थ के सोशल मीडिया चैट्स और उनके करीबियों के बयानों का मिलान कर रही है। सीबीआई की टीम इन जानकारियों के आधार पर एक विस्तृत प्रश्नावली तैयार कर विशेषज्ञों से कानूनी राय लेगी, जिससे आरोपपत्र की दिशा तय होगी। इसके अलावा, टीम को एम्स दिल्ली में हुए दूसरे पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट का भी इंतजार है।
Author: Vijay Chouhan


