Delhi News: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी की आशंका गहरा गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। इस वजह से भारतीय सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में पांच रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू बाजार पर सीधा दबाव बना रही हैं। तेल कंपनियां अपने घाटे को कम करने के लिए खुदरा कीमतों में जल्द ही बदलाव कर सकती हैं।
तेल कंपनियों को हर दिन हो रहा भारी नुकसान
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी तेल कंपनियों को वर्तमान में ऑटो ईंधन बेचने पर बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। पिछले दिनों कीमतों में लगभग साढ़े सात रुपये की बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों का घाटा पूरी तरह कम नहीं हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि राहत के आसार अभी बेहद कम हैं।
वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 5.5 रुपये का घाटा हो रहा है। वहीं डीजल की बिक्री पर कंपनियों को लगभग 4.5 रुपये प्रति लीटर का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस घाटे की भरपाई के लिए कीमतों को बढ़ाना कंपनियों की मजबूरी बन चुका है।
कंपनियों को घाटे से उबरने और ब्रेक-ईवन स्थिति में आने के लिए कम से कम पांच रुपये की तत्काल बढ़ोतरी करनी होगी। यदि कच्चे तेल के दाम ऐसे ही ऊंचे बने रहे, तो कुल बढ़ोतरी दस रुपये तक जा सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक इस स्थिति से निपटना बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
महंगाई की चौतरफा मार से बेहाल होगी जनता
ईंधन के दाम बढ़ने से केवल वाहन चलाना ही महंगा नहीं होगा, बल्कि इसका व्यापक असर देश की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ने से बाजार में हर जरूरी चीज महंगी हो जाएगी। आम उपभोक्ताओं के बजट पर इसका सीधा और बेहद नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
क्रिसिल के विश्लेषण के अनुसार ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से खाद्य वस्तुओं और कोर महंगाई में बड़ी तेजी आने की आशंका है। देश की पूरी सप्लाई चेन इस मूल्य वृद्धि से प्रभावित होगी। परिवहन पर निर्भर रहने वाले सभी व्यापारिक क्षेत्रों को आने वाले दिनों में भारी लागत का सामना करना पड़ेगा।
खासकर रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों जैसे डेयरी उत्पाद, ताजे फल, दालें, मसाले, चाय और कॉफी की खुदरा कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसके साथ ही अंडा, मीट और मछली की कीमतें भी ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ने से आसमान छूने लगेंगी, जिससे आम थाली का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
Author: Rajesh Kumar


