Delhi News: भारत में दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना की शुरुआत बेहद आधुनिक और तकनीकी बदलावों के साथ हो चुकी है। इस महाभियान के पहले चरण में मकानों की सूची तैयार की जा रही है, जबकि दूसरे चरण में देश की वास्तविक आबादी की सटीक गणना की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल होगी।
इस बार की जनगणना कई मायनों में बेहद खास और ऐतिहासिक होने वाली है। सरकार इस बार केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की ही अलग से विशेष गणना कर रही है। देश की अन्य सभी जातियों को इस बार सामान्य श्रेणी का हिस्सा मानकर उनके आंकड़े दर्ज किए जाएंगे।
झुग्गी-झोपड़ी और फ्लैट्स के लिए बने नए नियम
देश के इस सबसे बड़े प्रशासनिक कार्य में इस बार कई नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसमें गांव, पुरवा, झोपड़ी, बहुमंजिला अपार्टमेंट और फ्लैट्स की गिनती के लिए नए कड़े मानक तय किए गए हैं। प्रगणक अब लोगों की संख्या गिनने के साथ परिवारों की सामाजिक, शैक्षिक और भाषाई स्थिति का डेटा जुटाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक परिवारों को धर्म, मातृभाषा, साक्षरता, शिक्षा का स्तर और अपने आवास से जुड़ी सटीक जानकारियां देनी होंगी। इस विस्तृत डेटा से सरकार को भविष्य की कल्याणकारी योजनाएं बनाने में काफी मदद मिलेगी। नए नियमों के तहत बहुमंजिला अपार्टमेंट की हर विंग को एक भवन मानकर प्रत्येक फ्लैट को अलग नंबर मिलेगा।
पशुओं के स्थान और मजरों की अलग से होगी गिनती
प्रशासन ने झुग्गी-झोपड़ियों को भी अब आधिकारिक तौर पर आवास की श्रेणी में पूरी तरह शामिल कर लिया है। यदि इन झोपड़ियों में लोग रहते हैं और वहां नियमित भोजन बनता है, तो उनकी गिनती अनिवार्य रूप से की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और जनजाति के गांवों तथा मजरों को अलग से चिह्नित किया जाएगा।
इस बार के अभियान में पहली बार पशुओं के रहने वाले स्थानों की भी अलग से विस्तृत गणना की जा रही है। एक जिले में लगभग 49 हजार नागरिकों ने मोबाइल ऐप के जरिए खुद अपनी स्वगणना पूरी की है। इसके बाद अब प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की सूची बनाने की प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर रहे हैं।
जिला जनगणना अधिकारी तथा एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह ने बताया कि पहले चरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है। मकानों की सूची तैयार होने के बाद अगले चरण की आबादी गणना निर्धारित समय पर शुरू की जाएगी। इस बार डिजिटल तकनीक की मदद से डेटा प्रविष्टि में त्रुटियों की संभावना न के बराबर होगी।
Author: Gaurav Malhotra


