Uttar Pradesh News: मेरठ में हर साल विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा लाखों पौधे रोपे जाते हैं। मगर देखरेख के अभाव में एक साल के भीतर ही इनमें से 70 फीसदी पौधे गायब हो जाते हैं। वन विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि कागजी दावों के बीच जमीनी स्तर पर महज 30 से 40 प्रतिशत पौधे ही सुरक्षित बच पा रहे हैं।
इस साल 25 लाख पौधे लगाने का नया टारगेट
प्रशासन ने इस साल पर्यावरण दिवस पर 19 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था। इसके तुरंत बाद वर्ष 2026 के महाअभियान के तहत 24 विभागों को 25 लाख नए पौधे सौंपने की जिम्मेदारी मिली है। यह नया अभियान जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होगा, जिसके लिए जमीन तैयार की जा रही है।
काशी गांव में बनेगा पांच करोड़ का कान्हा उपवन
अधिकारियों ने बताया कि काशी गांव में लगभग 5 करोड़ रुपये की भारी लागत से 24,000 वर्ग मीटर में कान्हा उपवन विकसित किया जाएगा। इस बड़े उपवन में एक लाख फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा राजस्व विभाग के सहयोग से 130 हेक्टेयर से अधिक जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।
विभिन्न सरकारी विभागों को आवंटित हुआ रोपण लक्ष्य
इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने विभिन्न विभागों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत ग्राम्य विकास विभाग को 11.90 लाख, वन विभाग को 2.50 लाख, पंचायती राज को 1.35 लाख और राजस्व विभाग को 1.11 लाख पौधे लगाने का सख्त टारगेट मिला है। अन्य छोटे विभाग भी इस काम में सहयोग करेंगे।
हरीतिमा मोबाइल एप से होगी पौधों की लाइव निगरानी
पौधों को सूखने से बचाने के लिए प्रशासन इस बार हरीतिमा एप की मदद लेगा। संबंधित कर्मचारियों को हर हफ्ते रोपे गए पौधे की नई फोटो खींचकर एप पर अपलोड करनी होगी। यदि पौधा सूखता है, तो इसकी सीधी जवाबदेही उसी विभाग की होगी। इस डिजिटल मॉनिटरिंग से पौधों को जिंदा रखने की कोशिश होगी।
विकास की भेंट चढ़ी प्रमुख रास्तों की पूरी हरियाली
राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार 33 फीसदी भू-भाग पर वन क्षेत्र होना बेहद जरूरी है। इसके विपरीत मेरठ के कुल 2559 वर्ग किमी क्षेत्रफल में से केवल 2.66 फीसद हिस्से पर ही वन मौजूद है। शहर की दिल्ली रोड, गढ़ रोड और शास्त्रीनगर जैसे प्रमुख इलाकों की ग्रीन बेल्ट पूरी तरह सूख चुकी है।
Author: Ajay Mishra


