कंप्यूटर में आने वाले ‘BUG’ का असली सच उड़ा देगा होश, वायरस नहीं बल्कि इस खौफनाक जीव से जुड़ा है कनेक्शन!

Delhi News: टेक्नोलॉजी की दुनिया में ‘कंप्यूटर बग’ शब्द का इस्तेमाल रोजाना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे इतिहास का एक बेहद दिलचस्प और मजेदार किस्सा छिपा हुआ है? आपको जानकर हैरानी होगी कि कंप्यूटर बग शब्द किसी डिजिटल वायरस की वजह से नहीं, बल्कि एक असली कीड़े की वजह से वजूद में आया था।

जब पहली बार सामने आया दुनिया का पहला ‘कंप्यूटर बग’

बात 9 सितंबर 1947 की है, जब दुनिया के सबसे पहले कंप्यूटर बग का पता चला था। गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई आम सॉफ्टवेयर बग नहीं था। यह एक असली उड़ने वाला कीड़ा (पतंगा) था, जिसकी वजह से उस दौर के विशालकाय कंप्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर में तकनीकी खराबी आने लगी थी।

इस अनोखे मामले को प्रसिद्ध महिला कंप्यूटर साइंटिस्ट ग्रेस हॉपर ने रिकॉर्ड किया था। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जब उनके साथियों ने कंप्यूटर सिस्टम में बार-बार आ रहे एरर का कारण पता लगाया, तो वे दंग रह गए। मशीन के हार्डवेयर के भीतर एक असली कीड़ा फंसा हुआ था, जिसने सिस्टम को ठप कर दिया था।

मशीन से कीड़ा निकालकर किया गया ‘De-Bug’

नेशनल म्यूजियम ऑफ अमेरिकन हिस्ट्री के अनुसार, वैज्ञानिक उस समय ‘मार्क II’ कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। यह कंप्यूटर आज के लैपटॉप जैसा छोटा नहीं, बल्कि एक पूरे कमरे जितना बड़ा था। इसमें हजारों मैकेनिकल रिले, स्विच और तार लगे हुए थे। कीड़े की वजह से सिस्टम में शॉर्ट सर्किट हो गया था।

परेशानी को ठीक करने के लिए इंजीनियरों ने मशीन से उस कीड़े (बग) को बाहर निकाला। इस तरह पहली बार कंप्यूटर को ‘डी-बग’ किया गया। वैज्ञानिक ग्रेस हॉपर ने उस मृत कीड़े को अपनी आधिकारिक लॉगबुक डायरी में टेप से चिपका दिया। इसके बाद से ही प्रोग्रामिंग की भाषा में ‘बग’ और ‘डीबग’ शब्द हमेशा के लिए अमर हो गए।

Author: Mohit

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