रोल्स-रॉयस का भारत को महाऑफर, फाइटर जेट का स्वदेशी इंजन बनाने का रास्ता साफ, कांप उठेंगे चीन और पाकिस्तान

Defense News: ब्रिटेन की मशहूर कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारत को एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रस्ताव दिया है। कंपनी भारत में ही अत्याधुनिक एयरो गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स स्थापित करना चाहती है। यह डील देश के रक्षा क्षेत्र के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है।

रोल्स-रॉयस का यह बड़ा प्रस्ताव सिर्फ फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। ब्रिटिश कंपनी इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत भारत को पूरी तरह से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने को भी तैयार है। इस फैसले से पड़ोसी दुश्मन देशों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ने वाली हैं।

भारतीय स्टील्थ फाइटर जेट एमका को मिलेगी नई ताकत

यह ऐतिहासिक प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अपने महत्वाकांक्षी एमका प्रोग्राम पर काम कर रहा है। यह देश का पांचवीं पीढ़ी का आधुनिक और शक्तिशाली स्टील्थ फाइटर जेट है। इस बेहतरीन विमान को उड़ाने के लिए एक बेहद दमदार स्वदेशी इंजन की जरूरत है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोल्स-रॉयस का मानना है कि यह इंजन भारत में ही तैयार हो सकता है। यदि यह प्रोजेक्ट समय पर आगे बढ़ा तो साल 2032 तक इस नए स्वदेशी इंजन का पहला ग्राउंड टेस्ट शुरू हो जाएगा।

कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक साल 2034 के आसपास इस आधुनिक इंजन के साथ फाइटर जेट की पहली उड़ान संभव हो सकेगी। भारत लंबे समय से एक बेहतरीन हाई-थ्रस्ट जेट इंजन तकनीक विकसित करने की पुरजोर कोशिशों में जुटा हुआ है।

तकनीक मिलने से आत्मनिर्भर बनेगा भारतीय सैन्य रक्षा क्षेत्र

रोल्स-रॉयस के वर्किंग वाइस प्रेसिडेंट शशि मुकुंदन ने बताया कि यह पहल ब्रिटिश सरकार के पूर्ण सहयोग से की जा रही है। शुरुआती दौर में यह विशेष सुविधा सिर्फ भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने और नए प्रोग्राम पर केंद्रित रहेगी।

बाद में इस एडवांस तकनीक का विस्तार सिविल एविएशन और ड्यूल-यूज सेक्टर्स में भी आसानी से किया जा सकेगा। जेट इंजन बनाने की तकनीक बेहद जटिल मानी जाती है। दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही वर्तमान में यह महारत हासिल है।

इस डील के फाइनल होने से भारत रक्षा उत्पादन के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ जाएगा। रोल्स-रॉयस कंपनी पहले से ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर लंबे समय से काम कर रही है।

क्लीन एनर्जी के लिए न्यूक्लियर सेक्टर में भी दिलचस्पी

ब्रिटिश कंपनी रोल्स-रॉयस की रुचि सिर्फ विमान के इंजन बनाने तक ही सीमित नहीं है। कंपनी भारत के भीतर स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स की संभावनाओं को भी तलाश रही है। इस तकनीक को भविष्य की बेहद सुरक्षित न्यूक्लियर एनर्जी माना जाता है।

साफ है कि रोल्स-रॉयस भारत के साथ ऊर्जा और हाई-टेक डिफेंस इंडस्ट्री में एक बेहद मजबूत और लंबी साझेदारी बनाना चाहती है। इससे भारत जल्द ही उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा जिनके पास खुद का फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट है।

Author: Rajesh Kumar

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