ब्रेस्ट कैंसर मरीजों को अब नहीं झेलना पड़ेगा कीमोथेरेपी का दर्द! इस नए टेस्ट से डॉक्टरों को मिली बड़ी कामयाबी

Health: ब्रेस्ट कैंसर आज के समय में महिलाओं में होने वाले सबसे आम और खतरनाक कैंसरों में से एक बन चुका है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर आमतौर पर सर्जरी, रेडियोथेरेपी, हॉर्मोन थेरेपी और कीमोथेरेपी का सहारा लेते हैं। इनमें कीमोथेरेपी को सबसे ज्यादा कष्टदायक माना जाता है।

कीमोथेरेपी भले ही कैंसर को खत्म करने में काफी असरदार होती है, लेकिन इसके गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं। इसके कारण मरीजों के बाल झड़ना, अत्यधिक थकान और मतली जैसी भयंकर तकलीफें झेलनी पड़ती हैं। इसलिए डॉक्टर लंबे समय से इसका कोई सुरक्षित विकल्प तलाश रहे थे।

इसी दिशा में चिकित्सा वैज्ञानिकों को एक बहुत बड़ी और चमत्कारी कामयाबी मिली है। ‘OPTIMA Trial’ नाम की एक अंतरराष्ट्रीय स्टडी में सामने आया है कि अब ‘जीनोमिक टेस्टिंग’ की मदद से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किस मरीज को कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं है।

कैंसर सेल्स के जीन से पता चलेगी बीमारी की गंभीरता

यह आधुनिक जीनोमिक टेस्ट मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के अंदर मौजूद विशेष जीन की एक्टिविटी का गहराई से एनालिसिस करता है। इस जांच से डॉक्टरों को यह सटीक जानकारी मिल जाती है कि किसी महिला मरीज में ब्रेस्ट कैंसर के दोबारा लौटने का जोखिम कितना प्रतिशत है।

वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च के दौरान हजारों ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया। जांच में पाया गया कि जिन मरीजों में कैंसर के दोबारा लौटने का जोखिम बहुत कम था, उन्हें कीमोथेरेपी न देने पर भी इलाज के परिणाम बिल्कुल समान और सकारात्मक रहे।

अनावश्यक साइड इफेक्ट्स और दर्द से मिलेगी मुक्ति

इस खोज के बाद अब कम जोखिम वाले मरीजों को केवल हॉर्मोन थेरेपी देकर ही पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इससे भविष्य में महिलाओं को अनावश्यक कीमोथेरेपी के दर्द और उसके खतरनाक साइड इफेक्ट्स से बचाया जा सकेगा, जिससे उनका जीवन स्तर काफी बेहतर होगा।

कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक, यह जीनोमिक टेस्ट सभी प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के लिए जरूरी नहीं है। कैंसर कई अलग श्रेणियों और स्टेज का होता है। इसलिए कोई भी डॉक्टर मरीज की उम्र, कैंसर के प्रकार और मेडिकल हिस्ट्री को देखने के बाद ही इस टेस्ट की सलाह देते हैं।

चिकित्सा जगत में इस नई खोज को कैंसर के इलाज में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इससे अब डॉक्टरों को इलाज से जुड़े बड़े फैसले लेने में एक सटीक वैज्ञानिक आधार मिलेगा। अब कैंसर का इलाज सिर्फ उसके प्रकार को देखकर नहीं, बल्कि मरीज की स्थिति के अनुसार होगा।

Author: Asha Thakur

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