Business News: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के हालिया सर्वे के अनुसार, आगामी एक वर्ष के भीतर वैश्विक आर्थिक विकास दर में बड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है। दुनिया भर के मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस वैश्विक मंदी और सुस्ती के दौर में भी भारत अपनी मजबूत घरेलू मांग के दम पर सबसे अलग और आगे रहने वाला है।
डब्ल्यूईएफ ने अपने ताजा ‘चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक’ सर्वे में खुलासा किया है कि लगभग दस में से नौ मुख्य अर्थशास्त्रियों को आने वाले साल में वैश्विक विकास दर धीमी होने की आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि केवल 13 प्रतिशत विशेषज्ञों ने ही पूरी तरह से वैश्विक मंदी आने की बात कही है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, लगभग 94 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने यह चिंता जताई है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई काफी बढ़ सकती है। इसके बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट खड़ा होगा और खाने-पीने की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।
सप्लाई चेन और व्यापारिक मार्ग प्रभावित
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो जाएगी। मुख्य अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मौजूदा समय में इस व्यापारिक मार्ग का बंद होना पिछले साल टैरिफ (शुल्क) से जुड़ी उथल-पुथल के मुकाबले वैश्विक अर्थव्यवस्था को कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
इस गंभीर संकट का सबसे ज्यादा और सीधा असर पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्रों (MENA) पर पड़ने की आशंका जताई गई है। इसके विपरीत, भारत और अमेरिका अपनी मजबूत घरेलू मांग, बेहतर बाजार और निवेश के सहारे इस संकट के बीच भी वैश्विक मंच पर अपेक्षाकृत मजबूत बने रहेंगे।
डब्ल्यूईएफ के इस प्रतिष्ठित सर्वे में भारतीय अर्थव्यवस्था की जमकर तारीफ की गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत की विकास संभावनाएं लगातार सबसे बेहतर बनी हुई हैं। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का मजबूत अनुमान भी जताया गया है।
Author: Rajesh Kumar


