New Delhi: देश में रबी विपणन सीजन अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। सरकारी एजेंसियों ने 21 मई तक 33.39 मिलियन टन गेहूं की खरीद पूरी कर ली है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इस वर्ष रिकॉर्ड खरीद का जो लक्ष्य निर्धारित किया था, अब वह उसके काफी करीब पहुंच गई है।
पिछले वर्ष इसी अवधि तक कुल 9.64 मिलियन टन गेहूं ही खरीदा गया था। इस बार के मजबूत आंकड़ों के पीछे विभिन्न राज्यों में बेहतर खरीद प्रबंधन और किसानों की सक्रिय भागीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। सरकार ने कुल 34.5 मिलियन टन गेहूं खरीदने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था, जिसे हासिल करने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।
राज्यों का प्रदर्शन: पंजाब से मध्य प्रदेश तक
पंजाब में गेहूं की खरीद पिछले साल के 11.92 मिलियन टन से बढ़कर 12.16 मिलियन टन हो गई है। यह 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। हालांकि, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण इस बार गेहूं की गुणवत्ता पर असर पड़ा है, फिर भी खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रही है। राज्य का प्रदर्शन स्थिर बना हुआ है।
हरियाणा में खरीद का आंकड़ा 8.12 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो 7.2 मिलियन टन के निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक है। इसी तरह, मध्य प्रदेश ने सबसे चौंकाने वाले आंकड़े दर्ज किए हैं। वहां खरीद में पिछले साल के मुकाबले 22 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और कुल खरीद 9.5 मिलियन टन तक पहुंच गई है।
अन्य राज्यों की स्थिति और गुणवत्ता प्रबंधन
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी खरीद में तेजी देखी गई है। उत्तर प्रदेश में खरीद 1.48 मिलियन टन और राजस्थान में 2.03 मिलियन टन हो गई है। बिहार में तो खरीद पिछले साल के मुकाबले 89 प्रतिशत बढ़कर 33,295 टन पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने कई राज्यों के लिए खरीद लक्ष्यों में भी समय के साथ संशोधन किया है।
बेमौसम बारिश के कारण प्रभावित गेहूं के लिए सरकार ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रियायती विनिर्देश (URS) श्रेणी के तहत खरीदे गए गेहूं को अन्य फसल से अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य नमी और चमक में कमी जैसी समस्याओं के बावजूद फसल का सही हिसाब रखना और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाए रखना है।
Author: Rajesh Kumar


