ईरान-इजरायल युद्ध के बीच तेल किल्लत की अफवाहों पर सरकार का बड़ा बयान, पेट्रोल-डीजल को लेकर दूर की सबसे बड़ी टेंशन!

Business News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संकट और युद्ध के बीच देश के नागरिकों के लिए एक राहत भरी और बेहद महत्वपूर्ण खबर आई है। केंद्र सरकार ने बुधवार को साफ कर दिया है कि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त से अधिक आपूर्ति मौजूद है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश में तेल की किसी भी तरह की किल्लत की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने उन औद्योगिक उपभोक्ताओं को सख्त लहजे में चेतावनी दी है, जो अपने व्यावसायिक फायदे के लिए आम जनता के हक वाले सब्सिडी के खुदरा ईंधन को अवैध रूप से खरीद रहे हैं।

भारत के पास है ईंधन का महा-भंडार

मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दुनिया के चौथे सबसे बड़े रिफाइनिंग केंद्र भारत में 22 रिफाइनरियों की कुल 25.81 करोड़ टन शोधन क्षमता मौजूद है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 24.32 करोड़ टन की घरेलू खपत के मुकाबले बहुत अधिक ईंधन का उत्पादन किया है।

भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के बाद 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का दूसरे देशों को निर्यात भी किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी खुद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों, राज्यों और उद्योग संगठनों के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं ताकि निर्बाध आपूर्ति जारी रहे।

अफवाहों और स्थानीय कमी के पीछे की असली वजह

मंत्रालय ने राज्यों के मुख्य सचिवों और फिक्की-सीआईआई जैसे बड़े उद्योग मंडलों के साथ समीक्षा बैठक की है। इसमें जमीनी स्तर पर तेल की कोई कमी नहीं पाई गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि जहां कहीं आपूर्ति में कमी दिख रही है, वह किल्लत नहीं बल्कि कीमत के अंतर का फायदा उठाने की कोशिश है।

वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी पर रोजाना करीब 550 करोड़ रुपये का भारी नुकसान खुद उठा रही हैं। कंपनियां ऐसा इसलिए कर रही हैं ताकि देश के आम उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले भयानक उतार-चढ़ाव से बचाया जा सके।

खुदरा पेट्रोल पंपों पर बढ़ रहा है दबाव

सरकार ने साफ किया कि यह सब्सिडी वाला सस्ता ईंधन केवल खुदरा यानी आम उपभोक्ताओं के लिए है। लेकिन कुछ बड़े औद्योगिक खरीदार थोक बाजार के बजाय खुदरा पंपों से सस्ते में तेल उठा रहे हैं। इस अवैध गतिविधि के कारण ही कुछ पेट्रोल पंपों पर स्थानीय स्तर पर भारी दबाव देखा जा रहा है।

इस गड़बड़ी की वजह से निजी ईंधन कंपनियों की डीजल बिक्री में करीब 38 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। वहीं सरकारी कंपनियों के माध्यम से होने वाली थोक खपत में भी लगभग 29 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। क्योंकि बड़े कारखाने वाले लोग अब आम जनता की लाइन में लगकर तेल खरीद रहे हैं।

कालाबाजारी करने वालों पर बनेगी स्पेशल टीम

इस अवैध खेल को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को ईंधन की जमाखोरी, कालाबाजारी और हेराफेरी के खिलाफ विशेष प्रवर्तन दल (Special Enforcement Team) बनाने का निर्देश दिया है। सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें।

Author: Rajesh Kumar

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