भारत के ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक महा-निवेश, आईईए की रिपोर्ट ने दुनिया को चौंकाया; चीन-अमेरिका भी हैरान!

Business News: भारत के ऊर्जा क्षेत्र से एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। साल 2026 में देश का कुल ऊर्जा निवेश रिकॉर्ड 170 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की पूरी संभावना है। यह चमत्कारी वृद्धि मुख्य रूप से सौर ऊर्जा और तेल शोधन क्षेत्र के तेज विस्तार के दम पर हो रही है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपनी ताजा ‘विश्व ऊर्जा निवेश 2026’ रिपोर्ट में इस बात का बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच सालों के भीतर भारत में ऊर्जा निवेश की रफ्तार औसतन 11 प्रतिशत वार्षिक दर से लगातार बढ़ी है।

सौर ऊर्जा और तेल शोधन में भारी उछाल

भारत में इस अवधि के दौरान सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) निवेश में सालाना 25 प्रतिशत की भारी तेजी आई है। वहीं दूसरी तरफ तेल शोधन क्षेत्र में भी 23 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। ये दोनों ही क्षेत्र देश के कुल ऊर्जा व्यय का एक-चौथाई हिस्सा बन चुके हैं।

तेज निवेश की बदौलत भारत साल 2030 तक अपनी तेल शोधन क्षमता को करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, देश को अब भी अपनी जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ रहा है।

कोयला उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य

आईईए के आंकड़ों के मुताबिक, भारत कोयला आपूर्ति के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निवेशक बनकर उभरा है। पिछले एक दशक में इस क्षेत्र का निवेश तीन गुना बढ़ा है। साल 2026 में कोयला आपूर्ति निवेश 13 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है।

सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक घरेलू कोयला उत्पादन को वर्तमान के एक अरब टन से बढ़ाकर 1.5 अरब टन करना है। कोयला आज भी भारत के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा है, जो बिजली उत्पादन और भारी उद्योगों को मजबूत आधार देता है।

जीवाश्म ईंधन से परमाणु ऊर्जा की तरफ कदम

भारत ने साल 2025 में ही गैर-जीवाश्म स्रोतों से पचास प्रतिशत बिजली क्षमता हासिल करने का राष्ट्रीय लक्ष्य समय से पहले पा लिया था। अब देश जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली पर एक डॉलर खर्च करने के मुकाबले नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा में तीन डॉलर निवेश कर रहा है।

देश में जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा का निवेश साल 2020 के बाद से तीन गुना बढ़ चुका है। भारत का लक्ष्य साल 2047 तक अपनी परमाणु क्षमता को वर्तमान के नौ गीगावाट से बढ़ाकर सीधे 100 गीगावाट तक पहुंचाने का है।

विदेशी कंपनियों के लिए खुले दरवाजे

परमाणु क्षेत्र को रफ्तार देने के लिए सरकार ने नियमों में बड़े सुधार किए हैं। अब 49 प्रतिशत तक विदेशी हिस्सेदारी वाली निजी कंपनियों को छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर स्थापित करने की अनुमति मिल गई है। इससे देश में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की निविदाएं भी दोगुनी हो चुकी हैं।

सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी देश की कुल स्थापित क्षमता में अब आधी से ज्यादा हो चुकी है। इस बड़े बदलाव के कारण बिजली पारेषण और ग्रिड आधुनिकीकरण का काम तेज हो गया है, जो साल 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य को पूरा करेगा।

Author: Rajesh Kumar

Hot this week

Related Articles

Popular Categories