बीसीसीआई की स्वायत्तता पर सरकारी ब्रेक: अब 12 साल तक लगातार पद पर रह सकेंगे अधिकारी, ट्रिब्यूनल के पास जाएंगे विवाद

Sports News: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और उसके तमाम राज्य संघों की कार्यप्रणाली में आने वाले दिनों में एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। देश में राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, राष्ट्रीय खेल ट्रिब्यूनल और राष्ट्रीय खेल बोर्ड के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

अब तक भारतीय खेल जगत में पूरी तरह स्वायत्त और स्वतंत्र रूप से काम करने वाला बीसीसीआई इस नए कानून के लागू होते ही वैधानिक निगरानी और सरकारी नियमन के दायरे में आ जाएगा। इस नए प्रशासनिक ढांचे से बोर्ड के भीतर चुनाव प्रक्रिया, पदाधिकारियों की पात्रता और विवाद निपटान के नियमों में बड़ा उलटफेर होगा।

क्रिकेट के ओलिंपिक में शामिल होने से बदला पूरा ढांचा

केंद्रीय खेल मंत्रालय ने मंगलवार को जल्द ही अस्तित्व में आने वाले नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल (NST) और नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड (NSB) के कामकाज को लेकर नए नियम जारी कर दिए हैं। पिछले साल संसद से पास हुए राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के तहत अब बीसीसीआई को राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

क्रिकेट को ओलिंपिक खेलों में आधिकारिक रूप से शामिल किए जाने के कारण अब बोर्ड को इस नए सरकारी ढांचे के तहत अपनी निगरानी में आना ही होगा। हालांकि, इस नए नियम के लागू होने के बाद भी बीसीसीआई वित्तीय मामलों में एक पूरी तरह आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से स्वतंत्र संस्था बनी रहेगी।

आयु सीमा को लेकर लोढ़ा समिति से अलग होंगे नियम

राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के तहत बीसीसीआई पदाधिकारियों के लिए नई आयु सीमा और कार्यकाल के कड़े मापदंड तय किए गए हैं, जो सुप्रीम कोर्ट की लोढ़ा समिति की पुरानी सिफारिशों से काफी अलग होंगे। नए प्रविधानों के अनुसार बीसीसीआई अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष निर्धारित की गई है।

हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ (ICC) के नियमों में इसकी विशेष अनुमति होगी, तो नामांकन के समय इस आयु सीमा को बढ़ाकर 75 वर्ष तक किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त यदि कोई पदाधिकारी 70 वर्ष की उम्र पार करने से ठीक पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित हो जाता है, तो वह अपना पूरा कार्यकाल सम्मानपूर्वक पूरा कर सकेगा।

अब लगातार 12 वर्षों तक पद पर बने रह सकेंगे पदाधिकारी

नए कानून में कार्यकाल को लेकर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इसके तहत किसी भी पदाधिकारी को लगातार अधिकतम तीन कार्यकाल तक पद पर बने रहने की खुली अनुमति दी गई है। इस व्यवस्था में एक कार्यकाल कुल चार वर्ष का होगा, यानी कोई भी व्यक्ति लगातार अधिकतम 12 वर्षों तक बीसीसीआई की सत्ता संभाल सकेगा।

लगातार 12 साल का लंबा कार्यकाल पूरा करने के बाद संबंधित पदाधिकारी को एक पूरे कार्यकाल का अनिवार्य ‘कूलिंग ऑफ’ (Cooling-off) पीरियड लेना ही होगा। इस अनिवार्य ब्रेक के बाद ही वह व्यक्ति दोबारा बोर्ड का चुनाव लड़ने के लिए कानूनी रूप से योग्य माना जाएगा। इस नियम से कई दिग्गजों को लाभ मिलेगा।

फिलहाल लोढ़ा समिति के संविधान से ही चलेगा काम

खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जब तक यह नया कानून देश में पूरी तरह से प्रभावी और लागू नहीं हो जाता, तब तक बीसीसीआई और उसके सहयोगी राज्य संघ लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार बने पुराने संविधान से ही संचालित होते रहेंगे। लेकिन कानून के पूरी तरह अधिसूचित होते ही नए नियमों का पालन बाध्यकारी होगा।

मंत्रालय के अनुसार, नवनिर्मित राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB) देश की सर्वोच्च नियामक और सलाहकार संस्था के रूप में काम करेगा। यह बोर्ड एक स्वतंत्र राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल का संचालन करेगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि बीसीसीआई समेत देश के सभी बड़े खेल महासंघ तय प्रशासनिक और नैतिक मानकों का सख्ती से पालन कर रहे हैं।

विवादों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधीन बना नया ट्रिब्यूनल

खेल जगत में होने वाली अंदरूनी राजनीति और शिकायतों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय खेल ट्रिब्यूनल एक विशेष और त्वरित मंच होगा। इसके गठन के बाद बीसीसीआई से जुड़े सभी प्रकार के कानूनी विवाद और शिकायतें अब सामान्य दीवानी अदालतों (Civil Courts) में नहीं जा सकेंगी, बल्कि उनकी सुनवाई सीधे इसी ट्रिब्यूनल में की जाएगी।

कानून के अनुसार, इस विशेष ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए फैसलों को सामान्यतः केवल देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में ही चुनौती दी जा सकेगी। खेल मंत्रालय के इस नए और क्रांतिकारी ढांचे को भारतीय खेल प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और मुकदमों के तेज निपटारे की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

Author: Harikarishan Sharma

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