Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की वोटिंग शुरू होने से महज छह दिन पहले एक बड़ा मामला सामने आया है। शिमला जिला के चौपाल निर्वाचन क्षेत्र से आई एक गंभीर शिकायत ने आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के नेरवा तहसील की ग्राम पंचायत पवाहन में दर्जनों मतदाताओं के नाम दो राज्यों की वोटर लिस्ट में होने का सनसनीखेज आरोप लगा है।
स्थानीय निवासी देवा नंद शर्मा ने राज्य चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर इस पूरी गड़बड़ी का खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि पवाहन पंचायत के वार्ड नंबर-4 भाटगढ़ में करीब 61 मतदाताओं के नाम हिमाचल के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की मतदाता सूची में भी दर्ज हैं। शिकायतकर्ता ने इन सभी नामों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दर्ज कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
दोहरे पंजीकरण से चुनाव की निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस दोहरे पंजीकरण से न केवल चुनाव की पारदर्शिता प्रभावित होगी, बल्कि यह स्थानीय नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का भी हनन है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस सूची में शामिल 8 लोग तो उत्तराखंड के स्थायी निवासी हैं। वे वहां की 13 मई 2026 की मतदाता सूची में भी शामिल हैं और अनुसूचित जनजाति वर्ग के तहत लाभ उठा रहे हैं।
ग्रामीण पंकज शर्मा ने इस मामले में साक्ष्य सौंपते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि इन 61 लोगों में से एक महिला मतदाता तो हाल ही में उत्तराखंड के पंचायत चुनाव में वार्ड सदस्य चुनी गई हैं। इसके अलावा सूची में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग का नाम भी इसी साल शामिल किया गया है, जो पहले कभी यहां के मतदाता नहीं रहे थे।
मामला दो राज्यों से जुड़े होने के कारण चुनाव आयोग को ट्रांसफर
इस पूरे विवाद पर शिमला के जिला निर्वाचन अधिकारी और उपायुक्त अनुपम कश्यप ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फोन पर पुष्टि की कि उन्हें यह शिकायत 18 मई को मिली थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों पर आपत्तियां दर्ज कराने का समय पहले ही समाप्त हो चुका था, जिससे शिकायत में थोड़ी देरी हुई है।
प्रारंभिक जांच खंड विकास अधिकारी से करवाई गई है, जिसमें सामने आया कि आरोपित लोग इसी क्षेत्र के स्थायी निवासी हैं और उनके नाम पर जमीन भी है। हालांकि, उपायुक्त ने माना कि चूंकि मामला हिमाचल और उत्तराखंड दोनों राज्यों की वोटर लिस्ट से जुड़ा है, इसलिए इसे आगामी कार्रवाई के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया है।
इस गंभीर मामले को उजागर करने वाले देवा नंद शर्मा महज 27 वर्ष के युवा हैं। उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले आए इस मामले ने अब हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा से सटे कई अन्य सीमावर्ती इलाकों की सूचियों पर भी संदेह पैदा कर दिया है।
Author: Sunita Gupta


