Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और जानलेवा लू की चपेट में है। राज्य के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में पारा सामान्य से काफी ऊपर चला गया है। इस अप्रत्याशित मौसमी बदलाव ने स्थानीय लोगों के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालांकि, मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जताई है।
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, शिमला, मनाली, धर्मशाला और कसौली जैसे ठंडे पर्यटन स्थलों में भी पसीने छूट रहे हैं। राजधानी शिमला में न्यूनतम तापमान 20.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यह सामान्य से 5 डिग्री अधिक है। निचले इलाकों में चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
मौसम विभाग ने जारी किया आंधी और बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने झुलसाने वाली इस गर्मी के बीच एक बड़ी भविष्यवाणी की है। विभाग के अनुसार, 22 मई से राज्य के कई हिस्सों में मौसम करवट लेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने शिमला, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और सिरमौर जिलों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश होने की विशेष चेतावनी जारी की है।
मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि इस संभावित बारिश से तापमान में भारी गिरावट दर्ज होगी। इससे लोगों को भीषण गर्मी से तुरंत राहत मिल सकती है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे धूल भरी आंधी और तेज हवाओं के दौरान घरों में रहें और पूरी सावधानी बरतें।
चिलचिलाती धूप से बेहाल हुए स्थानीय लोग और सैलानी
इस भीषण तपिश का सीधा असर पर्यटन और व्यापार पर दिख रहा है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है। दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अपनी फसलों और पालतू मवेशियों को बचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
पहाड़ों की ठंडी वादियों का लुत्फ उठाने आए पर्यटक भी इस मौसम से हैरान हैं। होटल व्यवसायियों ने बताया कि सैलानी दोपहर में बाहर निकलने से बच रहे हैं। लोग केवल सुबह और शाम के समय ही घूमने निकल रहे हैं। इसके चलते पर्यटन स्थलों की रौनक दोपहर में गायब हो जाती है।
प्रशासन हुआ अलर्ट और स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर
बढ़ते संकट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी जिलों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। पानी की किल्लत से निपटने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। जगह-जगह शीतल पेय की व्यवस्था की जा रही है। हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आपातकालीन टीमें तैनात कर दी हैं।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों का यह रूप ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। यदि गर्मी का यह ट्रेंड जारी रहा, तो भविष्य में हमारी नदियों और हिमालयी इकोसिस्टम पर इसका बेहद बुरा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक और टिकाऊ नीतियां बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
Author: Sunita Gupta

