International News: ईरान के खिलाफ जारी भीषण युद्ध में अमेरिका को बहुत भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी संसद की आधिकारिक विंग ‘कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस’ की नई रिपोर्ट ने इस बात का चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस युद्ध को अब दो महीने से भी ज्यादा का समय बीत चुका है।
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम से एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। इस विशेष ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी वायुसेना के कम से कम 42 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और घातक रीपर ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गए हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
वियतनाम और इराक युद्ध के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा नुकसान
संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक वियतनाम और इराक युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका ने इतने आधुनिक और महंगे विमान खोए हैं। इस आधिकारिक रिपोर्ट को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, सेंट्रल कमान और विभिन्न खुफिया एजेंसियों से प्राप्त विश्वसनीय इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है।
इस जंग में अमेरिका का सबसे खतरनाक और आधुनिक माना जाने वाला ‘रीपर ड्रोन’ ईरान का सबसे आसान निशाना बना। रक्षा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरानी सेना ने युद्ध के दौरान अमेरिकी वायुसेना के कुल 24 रीपर ड्रोन मार गिराए हैं।
अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट और रिफ्यूलर विमान भी हुए तबाह
ईरान के हमलों ने दुनिया के सबसे एडवांस पांचवीं पीढ़ी के अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा युद्ध क्षेत्र में अग्रिम मोर्चे पर तैनात अमेरिका के 4 घातक एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
ईरानी वायुसेना ने हवा में ही लड़ाकू विमानों को ईंधन पहुंचाने वाले 7 बड़े अमेरिकी रिफ्यूलर विमानों को भी अपना निशाना बनाया। इस भारी नुकसान की सूची में 1 ग्राउंड-अटैक विमान, 1 ई-3 सेंट्री अवाक्स और 2 स्पेशल ऑपरेशंस विमान भी शामिल हैं।
अमेरिकी सेना का रेस्क्यू हेलीकॉप्टर और हाई-टेक जासूसी ड्रोन भी ध्वस्त
ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना का 1 रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी पूरी तरह ध्वस्त हो गया। इसके साथ ही बेहद आधुनिक माना जाने वाला जासूसी ड्रोन एमक्यू-4सी ट्राइटन भी नष्ट हुआ है। इन लगातार हो रहे नुकसानों ने अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बहुत बढ़ा दी है।
इस भीषण जंग का सीधा और बहुत बुरा असर अब अमेरिकी सरकारी खजाने पर भी पड़ने लगा है। अमेरिकी संसद की ‘हाउस एप्रोप्रिएशंस सबकमेटी’ की हालिया सुनवाई के दौरान पेंटागन के एक्टिंग कंट्रोलर जूल्स डब्ल्यू हर्स्ट तृतीय ने इस पर बहुत महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं।
29 अरब डॉलर के पार पहुंचा पेंटागन का कुल युद्ध खर्च
पेंटागन के मुताबिक ईरान में चल रहे इन सैन्य अभियानों का अनुमानित खर्च बढ़कर 29 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 2.4 लाख करोड़ रुपए होती है। रक्षा बजट का यह बहुत बड़ा हिस्सा युद्ध क्षेत्र में बर्बाद हो रहा है।
जूल्स डब्ल्यू हर्स्ट ने बताया कि यह भारी-भरकम राशि तबाह हुए सैन्य उपकरणों की जगह नए हथियार खरीदने में खर्च हो रही है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त फाइटर जेट्स और ड्रोन की मरम्मत पर भी बड़ी रकम खर्च की जा रही है जिससे बजट बिगड़ गया है।
सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहा वाशिंगटन अब खुद संकट में फंसा
अमेरिका इस युद्ध के जरिए ईरान पर दबाव बनाकर वहां सत्ता परिवर्तन करने का बड़ा सपना देख रहा था। लेकिन ईरान ने अब तक अमेरिकी सेना के सामने झुकने से पूरी तरह इनकार किया है। वह लगातार अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर कड़े पलटवार कर रहा है।
यह युद्ध कब थमेगा, इसके फिलहाल कोई भी ठोस संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचने के कारण अमेरिकी नागरिकों में भी सरकार के इस सैन्य फैसले के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है। इसका असर आगामी अमेरिकी नीतियों पर भी पड़ सकता है।
Author: Pallavi Sharma


