Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में निर्वाचन आयोग के एक नए फैसले से विवाद खड़ा हो गया है। आयोग ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव कर्मियों के लिए भोजन बनाने का जिम्मा सौंपा है। इस आदेश के बाद प्रदेशभर की आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
सीटू से संबद्ध आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की राज्य कमेटी ने इस फैसले को पूरी तरह अनुचित बताया है। यूनियन के नेताओं का कहना है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर पहले से ही काम का बोझ बहुत ज्यादा है। ऐसे में चुनाव ड्यूटी की अतिरिक्त जिम्मेदारी देना उनके साथ अन्याय होगा।
आंगनवाड़ी कर्मियों की सुरक्षा और नियमित ड्यूटी पर गहराया संकट
यूनियन ने इस फैसले के व्यावहारिक पहलू पर भी बड़े सवाल उठाए हैं। चुनाव ड्यूटी पर तैनात टीमें मतदान से एक दिन पहले ही पोलिंग बूथ पर पहुंच जाती हैं। इस वजह से आंगनवाड़ी कर्मियों के लिए यह तय करना मुश्किल होगा कि वे अपनी नियमित ड्यूटी करें या भोजन बनाएं।
इस आदेश से महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी भारी चिंता जताई जा रही है। आंगनवाड़ी में काम करने वाली सभी सदस्य महिलाएं हैं, जबकि चुनाव ड्यूटी में ज्यादातर पुरुष कर्मचारी तैनात रहते हैं। देर रात तक काम करने से महिला सुरक्षा का बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
यूनियन के अनुसार चुनाव कर्मियों के लिए भोजन बनाने और परोसने में रात के 11 बज सकते हैं। इतनी देर रात को महिला कर्मियों की सुरक्षित घर वापसी को लेकर प्रशासन के पास कोई ठोस योजना नहीं है। इस वजह से महिला कर्मियों के परिवारों में भी भारी चिंता देखी जा रही है।
यूनियन ने उठाई आदेश वापस लेने की मांग
इतिहास में यह पहली बार है जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की ड्यूटी रात के समय लगाने का प्रयास हुआ है। यूनियन का दावा है कि इससे पहले कभी भी उनकी ऐसी ड्यूटी नहीं लगी। यह नया फरमान पूरी तरह से महिला कर्मचारियों के लोकतांत्रिक और मानवीय हितों के खिलाफ है।
आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की राज्य अध्यक्ष नीलम जसवाल ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। उन्होंने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से इस विवादास्पद आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी कर्मचारी से जबरन काम नहीं कराया जाना चाहिए।
Author: Sunita Gupta


