New Delhi News: अंतरराष्ट्रीय बाजार से आम उपभोक्ताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले के बाद कच्चे तेल के दाम धड़ाम हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्क माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव गिरकर 109 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इस बड़ी गिरावट से दुनिया भर के वित्तीय बाजारों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ समय से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही थीं।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बड़े फैसले से पलटा बाजार का रुख
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस अचानक गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने ईरान पर होने वाले संभावित सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया है। दरअसल, पिछले कई दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव चरम पर बना हुआ था।
वैश्विक बाजार को डर था कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो खाड़ी देशों से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है। इस डर से तेल के दाम तेजी से भाग रहे थे। लेकिन जैसे ही ट्रंप ने हमले को टालने का रुख अपनाया, बाजार से युद्ध का डर पूरी तरह गायब हो गया।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इसका सीधा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के घरेलू शेयर बाजार सहित आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ता है।
पिछले कुछ दिनों में देश के भीतर सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की है। इससे दिल्ली और मुंबई समेत देश के कई बड़े शहरों में ईंधन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। ऐसे में ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का नीचे आना भारत के लिए राहत भरा संकेत है।
क्या घरेलू बाजार में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट के बाद अब आम जनता के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होंगे। एक्सपर्ट्स के मुताबिक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने से सरकारी तेल कंपनियों का आयात खर्च काफी कम हो जाएगा।
हालांकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत कम होंगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की यह गिरावट कितने दिनों तक स्थिर रहती है। अगर आने वाले दिनों में भी तेल के दाम 110 डॉलर के नीचे बने रहते हैं, तो भारतीय कंपनियों पर दबाव कम होगा।
Author: Rajesh Kumar


