New Delhi News: वैश्विक तेल बाजार में जारी उथल-पुथल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। अब पानी का इस्तेमाल भारी-भरकम मशीनों और औद्योगिक इंजनों में ईंधन बचाने के लिए किया जा सकेगा। मोनाको की एक टेक कंपनी ने यह क्रांतिकारी तकनीक पेश की है।
मोनाको स्थित मशहूर ईंधन प्रौद्योगिकी कंपनी ‘फोवे इको सॉल्यूशंस’ ने भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कंपनी ने अपनी पेटेंटेड ‘कैविटेक ईंधन इमल्शन’ तकनीक को पेश किया है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से बड़े उद्योग अपने ईंधन की भारी खपत को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
कंपनी का दावा है कि इस तकनीक को अपनाने से उद्योगों में ईंधन की खपत सीधे तौर पर 10 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक के इस्तेमाल के लिए कंपनियों को अपने पुराने इंजनों में कोई भी बदलाव नहीं करना पड़ेगा और न ही काम रोकना पड़ेगा।
इंजन के अंदर ‘सूक्ष्म विस्फोट’ का अनोखा विज्ञान
आमतौर पर माना जाता है कि ईंधन में पानी मिलने से इंजन पूरी तरह खराब हो सकता है। लेकिन कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) हेमंत सोंधी ने इसके पीछे का असली विज्ञान समझाया है। इस पूरी प्रक्रिया में “कंट्रोल्ड कैविटेशन टेक्नोलॉजी” का इस्तेमाल किया जाता है, जो पूरी तरह सुरक्षित है।
इस तकनीक के जरिए बिना किसी केमिकल के ईंधन और पानी का एक बेहद सूक्ष्म मिश्रण तैयार किया जाता है। जब यह मिश्रण इंजन के भीतर पहुंचता है, तो अत्यधिक तापमान के कारण पानी की बारीक बूंदें ‘सूक्ष्म विस्फोट’ पैदा करती हैं। इससे ईंधन बहुत ही बेहतर तरीके से जलता है।
ग्लोबल लैब्स और भारत में सफल परीक्षण
यह अनोखी तकनीक केवल कागजी दावा नहीं है, बल्कि दुनिया की बड़ी प्रयोगशालाओं में इसके सफल परीक्षण हो चुके हैं। डेनमार्क की अल्फा लावल प्रयोगशाला के टेस्ट में सामने आया कि इस तकनीक से जहाजों के इंजन में 8.7 प्रतिशत और बॉयलर में 6.3 प्रतिशत तक ईंधन की बचत हुई।
भारत की एक सरकारी रिफाइनरी की बिजली इकाई में भी इससे करीब 3.6 प्रतिशत ईंधन की सीधे बचत देखी गई। वहीं एक बड़े स्टील प्लांट में टेस्टिंग के दौरान ईंधन की खपत 5 प्रतिशत कम हुई। इसके साथ ही सबसे अच्छी बात यह रही कि प्रदूषण में 40 प्रतिशत की गिरावट आई।
भारत के आर्थिक संकट को दूर करने में मददगार
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसके लिए देश को हर साल अरबों डॉलर की भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार उद्योगों से ईंधन बचाने और नए विकल्प तलाशने की अपील करते रहे हैं। ऐसे में मोनाको की यह वाटर-बेस्ड तकनीक भारत के भारी आयात बिल को कम करने और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में एक बहुत बड़ी गेमचेंजर साबित हो सकती है।
Author: Rajesh Kumar

