सड़क पर फंसे बाघ को गजराज ने बचाया! कॉर्बेट पार्क में रेस्क्यू वाहन का पहिया धंसा, तो हाथी ने धक्का मारकर निकाला

Uttarakhand News: जंगल का असली राजा भले ही बाघ को माना जाता हो, लेकिन जब वन्यजीवों की सुरक्षा और मुश्किल हालात से निपटने की बात आती है, तो ‘गजराज’ ही संकटमोचक बनकर सामने आते हैं। उत्तराखंड के प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क से एक ऐसा ही बेहद दिलचस्प और अनोखा मामला सामने आया है।

पार्क के भीतर एक बीमार बाघ को वनकर्मियों की टीम ट्रक से रेस्क्यू सेंटर ले जा रही थी। तभी अचानक दुर्गम कच्चे रास्ते पर भारी वाहन के पहिए मिट्टी और रेत में गहरे धंस गए। काफी कोशिशों के बाद भी जब ट्रक टस से मस नहीं हुआ, तो टीम ने मदद के लिए अपने सबसे भरोसेमंद साथी यानी हाथी को बुलाया।

महावत का इशारा पाते ही प्रशिक्षित हाथी ने अपनी सूंड़ और सिर से ऐसा जोरदार धक्का लगाया कि भारी-भरकम ट्रक एक झटके में गड्ढे से बाहर आ गया। कॉर्बेट नेशनल पार्क की सुरक्षा, गश्त और बाघों के रेस्क्यू अभियानों में यहां के पालतू हाथी ही मुख्य रीढ़ माने जाते हैं। वर्तमान में यहां कुल 14 हाथी-हथिनी तैनात हैं।

होश में आने से पहले बाघ को बचाना था जरूरी

यह पूरा घटनाक्रम ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर ले जाते समय हुआ। अस्वस्थ बाघ को विभागीय टीम वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा के नेतृत्व में ले जा रही थी। बाघ को ट्रक के भीतर ट्रैंकुलाइज (बेहोश) कर पिंजरे में सुरक्षित रखा गया था। दुर्गम रास्ते पर टायर धंसने से ड्राइवर ने हाथ खड़े कर दिए थे।

वाहन फंसने से रेस्क्यू टीम की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी, क्योंकि ट्रैंकुलाइज किए गए बाघ को होश में आने से पहले हर हाल में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना बेहद जरूरी था। ऐसे में टीम ने बिना वक्त गंवाए पार्क के सबसे अनुभवी हाथी को मोर्चे पर उतारा, जिसने अपनी ताकत से इस रेस्क्यू को सफल बनाया।

वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शर्मा का कहना है कि आज हमारे पास भले ही आधुनिक और एडवांस तकनीक मौजूद है, लेकिन घने जंगलों के भीतर हाथियों का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। मानसून के दिनों में या उन घने जंगलों में जहां सरकारी गाड़ियां नहीं जा सकतीं, वहां हाथी ही गश्त का एकमात्र सहारा बनते हैं।

इन बड़े वन्यजीव अभियानों में भी मददगार रहे हाथी

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में साल 2018 से अब तक भेजे गए सभी पांचों बाघों के रेस्क्यू अभियान में इन अनुभवी हाथियों की मदद ली गई थी। इसके अलावा, साल 2018 में तीन वनकर्मियों को अपना शिकार बनाने वाले आदमखोर बाघ को पकड़ने में भी रेस्क्यू हाथी ने ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पार्क के सर्पदुली रेंज में एक वनकर्मी को मारने वाली आदमखोर बाघिन को काबू करने के लिए भी हाथियों की मदद लेनी पड़ी थी। यही नहीं, ऋषिकेश के भद्रकाली क्षेत्र में आतंक मचाने वाले एक बिगड़ैल टस्कर हाथी को शांत और रेस्क्यू करने में कॉर्बेट पार्क के तीन सबसे ताकतवर और पालतू हाथियों को विशेष तौर पर भेजा गया था।

Author: Harish Rawat

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