Global Business News: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स की चैरिटी संस्था से बड़ी खबर आई है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ अपना दशकों पुराना वित्तीय नाता पूरी तरह तोड़ दिया है। फाउंडेशन ने कंपनी में अपनी बची हुई आखिरी हिस्सेदारी भी बाजार में बेच दी है।
फाउंडेशन ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान माइक्रोसॉफ्ट के अपने सभी आखिरी 77 लाख शेयर बेच दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन बेचे गए शेयरों की कुल कीमत लगभग 3.2 अरब डॉलर आंकी गई है। भारतीय मुद्रा के अनुसार यह रकम करीब 26 हजार करोड़ रुपये बैठती है।
चैरिटी के लिए खत्म की सबसे बड़ी होल्डिंग
यह रणनीतिक कदम वैश्विक कॉर्पोरेट जगत में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट के शेयर कभी इस कल्याणकारी संस्था की सबसे बड़ी निवेश होल्डिंग हुआ करते थे। बिल गेट्स ने साल 1975 में पॉल एलेन के साथ मिलकर इस दिग्गज टेक कंपनी की नींव रखी थी।
बिल गेट्स ने समाज सेवा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपनी हिस्सेदारी फाउंडेशन को दान कर दी थी। कई सालों तक इन शेयरों की लाभांश आय से संस्था का काम चलता रहा। मशहूर निवेशक वॉरेन बफेट ने भी बर्कशायर हैथवे के जरिए संस्था को भारी वित्तीय मदद दी थी।
एक दौर में फाउंडेशन के पूरे निवेश पोर्टफोलियो में अकेले माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों का हिस्सा 27 फीसदी था। लेकिन संस्था ने जोखिम कम करने के लिए धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी घटानी शुरू कर दी। वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में संस्था ने करीब 65 फीसदी शेयर बेच दिए थे।
अब 2026 में आकर फाउंडेशन ने अपनी अंतिम हिस्सेदारी भी पूरी तरह बेच दी है। इस बड़े फैसले के पीछे बिल गेट्स की एक खास और दूरदर्शी योजना काम कर रही है। बिल गेट्स पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह चैरिटी संस्था हमेशा के लिए काम नहीं करेगी।
साल 2045 तक पूरी संपत्ति दान करने का लक्ष्य
गेट्स फाउंडेशन ने साल 2045 तक अपनी पूरी संचित संपत्ति को समाजसेवा में खर्च करने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इसी रणनीति के तहत आने वाले सालों में संस्था दान और वैश्विक विकास की सामाजिक परियोजनाओं पर रिकॉर्ड पैसा खर्च करने वाली है।
फाउंडेशन अकेले इसी साल दुनिया भर में करीब 9 अरब डॉलर की बड़ी ग्रांट राशि बांटने की तैयारी कर चुका है। हालांकि संस्था के पूरी तरह बाहर निकलने के बाद भी दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट की बाजार में ग्रोथ स्टोरी बहुत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते दौर में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी सबसे आगे चल रही है। कंपनी की एज्योर क्लाउड सर्विस और ओपेनएआई के साथ मजबूत साझेदारी को देखकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इसलिए बाजार में इसकी मांग बनी हुई है।
यही वजह है कि अरबपति निवेशक बिल ऐकमैन की कंपनी पर्शिंग स्क्वॉयर ने इसमें बड़ा दांव खेला है। उन्होंने हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में करीब 2.3 अरब डॉलर का भारी-भरकम नया निवेश किया है। इससे टेक बाजार में सकारात्मक संदेश गया है।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन हिस्सेदारी बेचने की खबर आई, उस दिन माइक्रोसॉफ्ट के शेयर थोड़े लाल निशान पर बंद हुए। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के लिहाज से टेक सेक्टर में कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत है।
इस बड़ी बिकवाली के बाद भी गेट्स फाउंडेशन के पास करीब 31.7 अरब डॉलर का विशाल निवेश पोर्टफोलियो सुरक्षित बचा हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट से पूरी तरह बाहर निकलकर संस्था अपनी भविष्य की कल्याणकारी नीतियों को नया रूप देने में जुट गई है।
फाउंडेशन अब अपनी नई निवेश रणनीति के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी उन्मूलन जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर ध्यान देगा। आने वाले समय में वैश्विक विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर बहुत तेजी से फंड खर्च किया जाएगा ताकि दुनिया को बेहतर बनाया जा सके।
Author: Rajesh Kumar


