हिमाचल निकाय चुनाव: थम गया शोर, अब ‘डोर-टू-डोर’ जोर; रविवार को 3.80 लाख वोटर करेंगे फैसला

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों—धर्मशाला, पालमपुर, मंडी और सोलन—सहित 51 शहरी निकायों में चुनावी शोर शुक्रवार दोपहर तीन बजे थम गया। अब प्रत्याशी सार्वजनिक रैलियां, जुलूस या टीवी-अखबारों में विज्ञापन नहीं दे सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष चुनाव के लिए बाहरी नेताओं को चुनाव क्षेत्र छोड़ने के निर्देश दिए हैं। अब रविवार, 17 मई को सुबह 7 से दोपहर 3 बजे तक मतदान होगा। इसके लिए पोलिंग पार्टियां शनिवार को ईवीएम के साथ रवाना होंगी।

शराबबंदी और विज्ञापनों पर सख्त पाबंदी

आयोग ने चुनाव वाले क्षेत्रों में शुक्रवार से 48 घंटों के लिए ‘ड्राई-डे’ घोषित कर दिया है। रविवार तक सभी शराब के ठेके और बीयर बार पूरी तरह बंद रहेंगे। विज्ञापन के सभी माध्यमों जैसे सिनेमा और सोशल मीडिया पर भी रोक लगा दी गई है। अब उम्मीदवार केवल घर-घर जाकर व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से ही वोट मांग सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने प्रशासन को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

नगर पंचायतों और नगर परिषदों के लिए रविवार शाम को ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। हालांकि, चारों प्रमुख नगर निगमों के भाग्य का फैसला 31 मई को मतगणना के बाद होगा। गौरतलब है कि नगर निगम चुनाव पार्टी चुनाव चिन्ह पर लड़े जा रहे हैं, जबकि छोटी इकाइयों में ऐसा नहीं है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। शनिवार शाम तक सभी टीमें अपने बूथों पर मोर्चा संभाल लेंगी।

चुनावी मैदान का गणित और नोटा का विकल्प

इस बार 439 पदों के लिए कुल 1147 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ईवीएम मशीनों में 15 प्रत्याशियों के नाम दर्ज करने की क्षमता है, जबकि अंतिम बटन ‘नोटा’ (NOTA) के लिए सुरक्षित रखा गया है। लगभग 3.80 लाख मतदाता इन उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। इसमें 1,80,963 पुरुष और 1,79,882 महिला मतदाता शामिल हैं। इनके अलावा 14 अन्य मतदाता भी लोकतंत्र के इस उत्सव में भागीदारी करेंगे।

प्रशासन ने संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त बल तैनात किया है ताकि पारदर्शी तरीके से मतदान संपन्न हो सके। चुनाव सामग्री और ईवीएम का वितरण शनिवार सुबह से शुरू हो जाएगा। आयोग ने मतदाताओं से भारी संख्या में घर से बाहर निकलकर मतदान करने की अपील की है। शहरी विकास और स्थानीय सरकार की दिशा तय करने वाले इन चुनावों पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। रविवार का दिन हिमाचल की स्थानीय राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।

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