ईरान युद्ध से दहला होर्मुज जलडमरूमध्य: थम गई दुनिया की धड़कन, क्या अब पाइपलाइनों के सहारे चलेगा ग्लोबल ऑयल मार्केट?

Middle East News: ईरान युद्ध को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है। इस संघर्ष ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह ठप कर दिया है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल तेल व्यापार का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। वर्तमान में अमेरिकी और ईरानी नौसेना की नाकेबंदी के कारण यहाँ से एक भी जहाज नहीं निकल पा रहा है। इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता और चिंता पैदा कर दी है।

वैश्विक आपूर्ति पर मंडराया अभूतपूर्व खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। सामान्य दिनों में यहाँ से रोजाना करीब 140 जहाज दो करोड़ बैरल कच्चा तेल लेकर निकलते हैं। सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि दुनिया की 20 प्रतिशत लिक्विफायड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई भी इसी मार्ग पर निर्भर है। हीलियम और यूरिया जैसी जरूरी वस्तुओं की एक-तिहाई आपूर्ति अचानक रुक जाने से कई देशों में कच्चे माल का भारी संकट खड़ा हो गया है।

वैकल्पिक मार्गों की अग्निपरीक्षा और सीमाएं

होर्मुज पर निर्भरता घटाने के लिए दशकों से वैकल्पिक योजनाओं पर काम चल रहा था। अब इन ‘बाईपास इंफ्रास्ट्रक्चर’ की असली परीक्षा हो रही है। वर्तमान में पाइपलाइन जैसे विकल्प प्रतिदिन 35 लाख से 55 लाख बैरल तेल के परिवहन में मदद कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ये विकल्प केवल आंशिक समाधान ही हैं। पाइपलाइन निर्माण में न केवल लंबा समय और अधिक निवेश लगता है, बल्कि युद्ध के दौरान इन पर हमले का खतरा भी अधिक रहता है।

सऊदी और यूएई की पाइपलाइनें बनीं जीवनरेखा

सऊदी अरब की ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ इस संकट में बड़ी राहत दे रही है। यह पाइपलाइन लाल सागर के जरिए रोजाना 70 लाख बैरल तेल यूरोप तक पहुंचा सकती है। मिस्र की ‘सुमेद पाइपलाइन’ ने भी अपनी क्षमता 150 प्रतिशत तक बढ़ाकर यूरोप को राहत दी है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ‘एडकोप’ पाइपलाइन सीधे हिंद महासागर तक पहुंचती है। यह रोजाना 20 लाख बैरल तेल निर्यात करने में सक्षम है और होर्मुज को बाईपास करने का सबसे प्रभावी जरिया बनी है।

इराक, कुवैत और कतर के सामने भारी चुनौती

खाड़ी के अन्य बड़े तेल उत्पादक देशों की स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। इराक का बसरा से होने वाला 34 लाख बैरल का निर्यात लगभग ठप पड़ गया है। कुवैत पूरी तरह होर्मुज पर निर्भर है और उसके पास कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। कतर के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह दुनिया की 19 प्रतिशत गैस जरूरतों को पूरा करता है। रास लाफान टर्मिनल से होने वाला उसका पूरा एलएनजी निर्यात फिलहाल होर्मुज की नाकेबंदी के कारण फंसा हुआ है।

ईरान के अपने प्रयास भी पड़े फीके

ईरान ने खुद को सुरक्षित रखने के लिए गोरेह से जास्क तक 1000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन तैयार की थी। इसकी क्षमता रोजाना 10 लाख बैरल है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और तकनीकी बाधाओं ने इसे विफल कर दिया है। अमेरिकी डेटा के अनुसार, 2024 में इससे नाममात्र की आपूर्ति हुई और सितंबर में इसे बंद करना पड़ा। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते से अब तक केवल एक ही टैंकर तेल लेकर निकल सका है, जो ऊंट के मुंह में जीरा समान है।

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