Madhya Pradesh News: नारी शक्ति वंदन कानून को लेकर देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में महिला आरक्षण बिल पारित कराने के बाद अब राज्यों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसी राज्य सरकारों ने विशेष सत्र बुलाकर इस कानून के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए हैं। हालांकि, विपक्ष इसे केवल एक राजनीतिक दिखावा बता रहा है। भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में हंगामा और कांग्रेस का वॉकआउट
मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार, 27 अप्रैल को महिला आरक्षण के समर्थन में एक महत्वपूर्ण सरकारी प्रस्ताव लाया गया। सदन ने परिसीमन और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने के केंद्र के फैसले का पुरजोर समर्थन किया। लेकिन चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस विधायकों ने भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए तमाशा करने का आरोप लगाया। अंततः विरोध स्वरूप कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
दिल्ली विधानसभा में भी गूंजा महिला आरक्षण का मुद्दा
मध्य प्रदेश के बाद मंगलवार, 28 अप्रैल को दिल्ली विधानसभा का विशेष एक दिवसीय सत्र आयोजित हुआ। यहाँ भी नारी शक्ति वंदन कानून के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया। सत्र के दौरान भाजपा सदस्यों ने विपक्षी दलों की जमकर आलोचना की। सत्ता पक्ष का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को उनका हक दिलाया है। वहीं, विपक्षी खेमे ने सवाल उठाया कि जब मंशा साफ है, तो आरक्षण लागू करने में देरी क्यों हो रही है?
विपक्ष की चुनौती: तुरंत लागू क्यों नहीं होता आरक्षण?
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने पहले ही इस बिल को समर्थन देने का एलान किया था। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे महिलाओं को एक-तिहाई सीटें देने के पक्ष में हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार बिना परिसीमन और जनगणना के इंतजार के इसे तत्काल प्रभाव से लागू करे। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा इसे लागू करने के बजाय केवल सत्र बुलाकर राजनीति करना चाहती है। इससे संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग की चर्चा छिड़ गई है।
परिसीमन और आरक्षण के बीच फंसा पेच
नारी शक्ति वंदन कानून के तहत आरक्षण तभी लागू होगा जब जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होगी। सरकार की इस शर्त ने विपक्ष को हमले का मौका दे दिया है। आलोचकों का मानना है कि भाजपा केवल अपनी ब्रांडिंग के लिए विधानसभा सत्रों का उपयोग कर रही है। वे इसे ‘क्रेडिट लेने की होड़’ करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इसी तरह के विशेष सत्र देखने को मिल सकते हैं।


