Uttar Pradesh News: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIAL) के संचालन को लेकर जेएम फाइनेंशियल ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में दिल्ली एयरपोर्ट के कारोबार पर पड़ने वाले असर के डर को काफी हद तक दूर कर दिया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले तीन से चार दशकों में दिल्ली एयरपोर्ट से केवल 10 से 15 प्रतिशत यात्री ही नोएडा की ओर रुख करेंगे। इस विश्लेषण ने उन चिंताओं को शांत कर दिया है जिनमें दिल्ली के एकाधिकार खत्म होने की बात कही जा रही थी।
घरेलू उड़ानों तक सीमित रहेगा ट्रैफिक शिफ्ट होने का असर
ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा एयरपोर्ट की शुरुआत से दिल्ली एयरपोर्ट के केवल घरेलू ट्रैफिक पर ही थोड़ा प्रभाव पड़ेगा। कम किराए वाली उड़ानों और कम मुनाफे वाले यात्री ही जेवर एयरपोर्ट की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इसके विपरीत, अधिक राजस्व देने वाला अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक अभी भी दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर ही बना रहेगा। इससे दिल्ली एयरपोर्ट के कुल मुनाफे पर कोई बड़ा या नकारात्मक असर पड़ने की संभावना फिलहाल बहुत ही कम नजर आ रही है।
कनेक्टिविटी और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर दिल्ली एयरपोर्ट की असली ताकत
इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी शानदार कनेक्टिविटी है। मेट्रो, रेलवे नेटवर्क और एक्सप्रेसवे से जुड़ा होने के कारण दिल्ली-एनसीआर के निवासी इसे पहली प्राथमिकता देते हैं। रिपोर्ट बताती है कि बेहतर परिवहन सुविधाओं की वजह से दिल्ली एयरपोर्ट का यूजर बेस बहुत मजबूत है। जब तक नोएडा एयरपोर्ट अपनी कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार नहीं करता, तब तक भारी मात्रा में ट्रैफिक का वहां शिफ्ट होना नामुमकिन सा लगता है। दिल्ली एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा इसे अग्रणी बनाए रखेगा।
इंटरनेशनल यात्रियों से होने वाली मोटी कमाई रहेगी सुरक्षित
किसी भी बड़े एयरपोर्ट के रेवेन्यू का मुख्य जरिया अंतरराष्ट्रीय यात्री और ड्यूटी-फ्री शॉपिंग जैसी सेवाएं होती हैं। जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि दिल्ली के इंटरनेशनल ट्रैफिक में गिरावट चार प्रतिशत से भी कम रहने की उम्मीद है। चूंकि असली कमाई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से ही होती है, इसलिए दिल्ली एयरपोर्ट के बिजनेस मॉडल को नोएडा से कोई गंभीर खतरा नहीं है। दिल्ली के पास अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का जो विशाल नेटवर्क है, उसे टक्कर देना नोएडा के लिए बड़ी चुनौती होगी।
भौगोलिक स्थिति और कार्गो बिजनेस में भी दिल्ली ही आगे
हैरान करने वाली बात यह है कि नोएडा के कुछ इलाकों के लिए भी दिल्ली एयरपोर्ट ज्यादा सुलभ है। गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के कई हिस्सों से यात्रा समय के मामले में दिल्ली एयरपोर्ट अब भी बेहतर विकल्प है। वहीं कार्गो सेगमेंट में भी नोएडा का असर काफी सीमित रहने वाला है। शुरुआती वर्षों में सिर्फ छह प्रतिशत कार्गो ट्रैफिक ही नोएडा शिफ्ट हो सकता है। दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई क्षमता बेहद मजबूत है, जिसे भेदना नोएडा के लिए फिलहाल कठिन कार्य है।
भविष्य में एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि सहयोगी होंगे दोनों एयरपोर्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भविष्य में दिल्ली का प्रतिस्पर्धी कम और सहयोगी ज्यादा साबित होगा। जैसे-जैसे दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव बढ़ेगा, नोएडा एयरपोर्ट उस अतिरिक्त भार को संभालने में मदद करेगा। यह दोनों एयरपोर्ट एक-दूसरे के पूरक की तरह काम करेंगे, जिससे पूरे एनसीआर के एविएशन सेक्टर को मजबूती मिलेगी। अंततः, दिल्ली एयरपोर्ट अपनी पकड़ और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण बाजार में अपनी बादशाहत बरकरार रखने में पूरी तरह सफल रहेगा।


