Russia News: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। तिहत्तर वर्षीय पुतिन खुद को एक सौ बीस साल तक जीवित रखने के लिए एक सीक्रेट मिशन पर काम कर रहे हैं। वे इस प्रोजेक्ट के जरिए अपनी बढ़ती उम्र को रोकना चाहते हैं।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार इस महात्वाकांक्षी अमरत्व प्रोजेक्ट का कुल बजट करीब 2.15 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। इसके तहत आधुनिकतम थ्री-डी बायोप्रिंटिंग तकनीक से मानव अंग तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही रूसी वैज्ञानिक बुढ़ापे को मात देने के लिए उन्नत जीन थेरेपी का सहारा ले रहे हैं।
इस पूरे रहस्य की शुरुआत पिछले साल बीजिंग में आयोजित एक सैन्य परेड के दौरान हुई थी। उस वक्त व्लादिमीर पुतिन ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के कान में बहुत धीमी आवाज में कुछ कहा था। उन्होंने कहा था कि इंसान अपने खराब अंग बदलकर हमेशा के लिए अमर हो सकता है।
वैश्विक समुदाय ने पहले इसे दो बड़े नेताओं की सामान्य बातचीत माना था। हालांकि हाल ही में लीक हुए कुछ गोपनीय दस्तावेजों ने इस बात की पूरी पुष्टि कर दी है। पुतिन वास्तव में इस सीक्रेट मेडिकल प्रोजेक्ट पर काफी समय से गंभीरता के साथ काम कर रहे हैं।
बेहद गुप्त राष्ट्रीय परियोजना को मिला नया नाम
पुतिन और उनके बेहद करीबी सहयोगियों की ढलती उम्र को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय परियोजना चलाई जा रही है। इस संवेदनशील मिशन को ‘न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज’ नाम दिया गया है। इसकी पूरी कमान पुतिन के सबसे वफादार वैज्ञानिकों और उनकी डॉक्टर बेटी मारिया के पास है।
रूसी राष्ट्रपति का मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक कृत्रिम या जैविक रूप से विकसित मानव अंग तैयार करना है। वे चाहते हैं कि जरूरत पड़ने पर बूढ़े हो चुके शरीर के अंगों को इन नए अंगों से आसानी से बदल दिया जाए। इससे इंसान की उम्र काफी ज्यादा बढ़ जाएगी।
खुद को हमेशा जवान और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए पुतिन बेहद कड़े नियमों का पालन करते हैं। वे खुद को चुस्त रखने के लिए क्रायोथेरेपी का सहारा लेते हैं। इसके तहत वे बिना कपड़ों के माइनस 112 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले एक विशेष चेंबर में खड़े रहते हैं।
इसके अलावा पुतिन को बछड़ों के टिशू से तैयार खास पेप्टाइड्स दवाएं भी दी जाती थीं। रूस के दिवंगत गेरेंटोलॉजिस्ट का दावा था कि इसकी मदद से इंसान 120 साल जी सकता है। गौरतलब है कि रूस में आम पुरुषों की औसत आयु मात्र 68 वर्ष ही है।
मिनी-पिग्स के शरीर में उगाए जाएंगे इंसानी अंग
इस प्रोजेक्ट के तहत रूस की सरकारी विज्ञान एजेंसियों ने चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में चूहों की थायराइड ग्रंथि को सफलतापूर्वक उगाया है। इसके साथ ही उन्होंने लैब में इंसानी कार्टिलेज बनाने में भी बड़ी कामयाबी पाई है।
रूसी वैज्ञानिकों का अगला बड़ा लक्ष्य मिनी-पिग्स के शरीर का उपयोग करना है। आनुवंशिक रूप से इंसानों से मेल खाने वाले इन जीवों के भीतर इंसानी लिवर, किडनी और दिल को विकसित किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भविष्य में अंगों को ट्रांसप्लांट किया जा सके।
रूस के उप-विज्ञान मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने हाल ही में इसकी आधिकारिक घोषणा भी की है। उन्होंने बताया कि उनके वैज्ञानिक एक ऐसी विशेष जीन-थेरेपी पर काम कर रहे हैं। यह अत्याधुनिक थेरेपी मानव कोशिकाओं के बूढ़े होने की गति को पूरी तरह से धीमा कर देगी।
Author: Pallavi Sharma

