World News: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग बहुत तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को भयानक अंजाम भुगतने की खुली धमकी दी है। इसके तुरंत बाद ईरान ने अमेरिका को कड़ा जवाब दिया है। ईरान ने अमेरिका को उसकी पुरानी सैन्य विफलताओं की याद दिलाई है। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ती इस भयंकर तनातनी से पूरी दुनिया में खौफ का माहौल बन गया है।
ट्रंप की धमकी और अमेरिकी पायलट का रेस्क्यू
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने ईरान को तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का सख्त आदेश दिया है। ट्रंप ने कहा कि ऐसा न करने पर ईरान के पावर प्लांट और पुलों को उड़ा दिया जाएगा। उन्होंने ईरान पर एक अभूतपूर्व हमले की बात कही है। यह धमकी एक अमेरिकी पायलट को बचाने के सफल मिशन के बाद आई है। ट्रंप ने इस अभियान को अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू मिशन करार दिया है।
ईरान का पलटवार और 1980 के मिशन की याद
ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने कड़ा पलटवार किया है। ईरान ने अमेरिकी बचाव मिशन को पूरी तरह से असफल करार दिया है। ईरानी दूतावासों ने 1980 के फेल हुए ऑपरेशन ईगल क्लॉ का सीधा जिक्र किया। ईरान ने कहा कि अमेरिका का इतिहास फिर से दोहरा रहा है। उस समय भी अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। ईरानी सेना ने दावा किया कि नया अमेरिकी अभियान भी बुरी तरह से नाकाम रहा है।
विमानों का मलबा और दावों में भारी टकराव
अमेरिका और ईरान के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। ईरानी मीडिया ने जले अमेरिकी विमानों के मलबे की तस्वीरें जारी की हैं। फंसे अमेरिकी पायलट के पास पिस्टल और विशेष संचार उपकरण मौजूद था। वह लगातार बचाव टीम के संपर्क में बना था। अभियान के दौरान कई अमेरिकी विमान अचानक खराब हो गए थे। अमेरिकी सेना ने दुश्मन से बचाने के लिए खुद अपने विमान नष्ट कर दिए। इसके बाद अन्य विमानों से पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया।
युद्ध का बढ़ता दायरा और मंडराता परमाणु खतरा
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रखा है। इजरायल सहित खाड़ी देशों पर हमले तेज हो गए हैं। यूएई, बहरीन और कुवैत को नुकसान पहुंचा है। इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमले हुए। एक हमले में छह लोगों की मौत हो गई। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बेहद कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि बुशेहर परमाणु संयंत्र पर किसी भी हमले से भारी रेडिएशन फैलेगा। इससे खाड़ी देशों में एक बहुत बड़ा और जानलेवा खतरा पैदा हो सकता है।


