World News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर चल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां बेहद जटिल बनी हुई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान को अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) रखने की अनुमति नहीं देगा। वहीं, दूसरी ओर ईरान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने ट्रंप प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी इस मध्यस्थता प्रक्रिया में एक अहम कड़ी बने हुए हैं। वे हाल ही में ईरान की यात्रा पर गए हैं ताकि शांति वार्ता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अभी भी परमाणु हथियारों और होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर गहरे मतभेद बरकरार हैं।
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के परमाणु भंडार को नष्ट करने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा, “हम उसे हासिल करेंगे और संभवतः नष्ट कर देंगे, लेकिन ईरान को उसे रखने नहीं देंगे।” ईरान फिलहाल अमेरिकी प्रस्तावों पर विचार कर रहा है, लेकिन तेहरान के भीतर ही परमाणु रियायतों को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे वार्ता की सफलता पर संशय बना हुआ है।
ईरान का पुनर्निर्माण और अमेरिका की चुनौती
खुफिया आकलन से पता चला है कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने चुपचाप अपने ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रमों का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान उम्मीद से कहीं तेजी से अपनी सैन्य क्षमता वापस हासिल कर रहा है। अनुमान है कि ईरान अगले छह महीनों के भीतर अपनी ड्रोन हमला करने की पूरी क्षमता को बहाल कर सकता है।
यह घटनाक्रम अमेरिकी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि भविष्य में संघर्ष दोबारा शुरू होता है, तो ईरान पूरी तरह तैयार और जवाबी कार्रवाई करने की स्थिति में होगा। ईरान का अपने मिसाइल साइट्स और हथियारों के उत्पादन को तेजी से फिर से खड़ा करना यह संकेत देता है कि वह दबाव के बावजूद अपनी सुरक्षा नीतियों को लेकर बेहद आक्रामक है।
पेंटागन का मिसाइल स्टॉक हुआ आधा
द वॉशिंगटन पोस्ट की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की रक्षा करने के चक्कर में अमेरिका के अपने मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर के खजाने पर भारी असर पड़ा है। इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने 200 से ज्यादा THAAD इंटरसेप्टर और 100 से ज्यादा SM-3 और SM-6 मिसाइलें दागीं। इससे पेंटागन के पास मौजूद इन्वेंट्री का लगभग आधा हिस्सा खर्च हो चुका है।
इस कमी से जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगियों में भी चिंता है, जो चीन और उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिकी सुरक्षा कवच पर निर्भर हैं। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की उत्पादन क्षमता फिलहाल मांग के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है। यह स्थिति आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति और सैन्य तैयारियों पर गंभीर दबाव डालने वाली है।
Author: Pallavi Sharma


