Himachal News: हिमाचल प्रदेश में रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। इस पूरे मामले पर हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने अपनी स्थिति साफ की है। रेरा अध्यक्ष आरडी धीमान ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
रेरा अध्यक्ष आरडी धीमान ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में किए गए सभी पंजीकरण पूरी तरह कानून के दायरे में हैं। संयुक्त विकास समझौते यानी जेडीए के तहत बनी परियोजनाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार ही मंजूरी मिली है। हिमाचल प्रदेश रेरा नियम 2017 के तहत ही यह पूरी प्रक्रिया पूरी की गई है।
धारा 118 के कथित उल्लंघन पर रेरा की सफाई
हाल के दिनों में रेरा पर लैंड रिफॉर्म एक्ट की धारा 118 के उल्लंघन को नजरअंदाज करने के आरोप लगे थे। कहा जा रहा था कि गैर-कृषक डेवलपर्स के साथ हुए समझौतों को गलत तरीके से मंजूरी दी गई। इन गंभीर आरोपों पर अध्यक्ष ने कहा कि प्राधिकरण ने केवल दस्तावेजों की नियामकीय जांच की है।
रेरा के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक कुल 17 जेडीए आधारित परियोजनाएं पंजीकृत की गई हैं। इनमें से 12 मामलों में जेडीए पार्टनर खुद मूल रूप से कृषक हैं। केवल 5 परियोजनाओं में ही गैर-कृषक डेवलपर शामिल थे। इसलिए नियमों की अनदेखी का सवाल ही नहीं उठता।
राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ने 7 नवंबर 2023 को एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया था। इसके अनुसार गैर-कृषक डेवलपर के लिए भी धारा 118 के तहत मंजूरी लेना बिल्कुल अनिवार्य कर दिया गया है। इस आदेश के सामने आने के बाद रेरा ने ऐसी किसी नई परियोजना को मंजूरी नहीं दी है।
इस पूरे विषय पर रेरा ने 4 दिसंबर 2023 को राज्य सरकार से एक औपचारिक स्पष्टीकरण भी मांगा था। हालांकि इस पत्र को भेजे जाने के बाद भी सरकार की तरफ से अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। प्राधिकरण नियमों के तहत ही अपनी आगामी कार्यप्रणाली को आगे बढ़ा रहा है।
चर्चित चेस्टर हिल मामले में आया नया मोड़
रेरा ने बहुचर्चित चेस्टर हिल-2 और चेस्टर हिल-4 परियोजनाओं को लेकर भी एक बड़ा खुलासा किया है। भूमि मालिक हंसराज ठाकुर और मैसर्स चेस्टर हिल्स के बीच 2 जून 2022 को जेडीए हुआ था। बाद में दोनों पक्षों ने 15 जनवरी 2025 को इसे आपसी सहमति से रद्द कर दिया था।
मुख्य सचिव (टीसीपी) ने 6 नवंबर 2025 को पारित अपने आदेश में इस बात को पूरी तरह स्पष्ट किया था। यह संबंधित जेडीए कभी भी व्यावहारिक रूप से लागू नहीं हो सका था। इसलिए कानून की नजर में इसे अस्तित्वहीन दस्तावेज माना गया। इसे धारा 118 का उल्लंघन बिल्कुल नहीं कहा जा सकता।
रेरा अध्यक्ष आरडी धीमान ने अंत में अपने अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने साफ किया कि प्राधिकरण का कार्य केवल दस्तावेजों और अनुबंधों की नियामकीय जांच करना है। रेरा के पास भूमि अधिकारों का फैसला करने या किसी भी तरह के राजस्व विवाद को सुलझाने का अधिकार नहीं है।

