Dubai News: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव का सीधा असर अब खाड़ी देशों में रहने वाले शिया मुसलमानों पर दिखने लगा है। एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने पाकिस्तान के हजारों शिया मुस्लिम नागरिकों को अचानक वापस उनके देश भेज दिया है।
दावा किया जा रहा है कि प्रभावित लोग पिछले कई दशकों से यूएई में बेहद शांति से रहकर नौकरियां और व्यापार कर रहे थे। अचानक उठाए गए इस सख्त कदम से इन प्रवासियों का पूरा जीवन पूरी तरह तबाह हो गया है। इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
बिना सामान और जमा-पूंजी लिए विमान से वापस भेजे गए लोग
पाकिस्तान लौटे शिया मुस्लिमों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें बिना कोई सामान या बैंक में जमा अपनी गाढ़ी कमाई समेटने का मौका दिए सीधे विमान में बैठा दिया। पाकिस्तान के एक ही गांव में ऐसे सौ से अधिक मजदूर वापस लौटे हैं, जिनकी पूरी जीवन भर की बचत छिन चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट इस गंभीर मामले की पुष्टि करती है। कुल 103 पाकिस्तानी नागरिकों ने बयान दिया है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी नोटिस के यूएई से अचानक डिपोर्ट कर दिया गया। यह हैरान करने वाली प्रशासनिक कार्रवाई विशेष रूप से केवल शिया समुदाय के लोगों पर की गई है।
मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन के डेटाबेस से सामने आया बड़ा सच
पाकिस्तान के प्रमुख शिया राजनीतिक संगठन मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन ने इस संकट पर एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया है। इस आंकड़े के अनुसार 28 फरवरी 2026 से लेकर अब तक लगभग 7500 से अधिक पाकिस्तानी शियाओं को यूएई से जबरन बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
संगठन के नेताओं ने आधिकारिक बयान में अंदेशा जताया है कि डिपोर्ट किए गए लोगों की वास्तविक संख्या इस आंकड़े से कहीं ज्यादा हो सकती है। संयोग से अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ही ईरान पर पहला बड़ा हवाई हमला किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई तेज हुई।
ईरान के मिसाइल हमलों के बाद कार्रवाई में आई भारी तेजी
पाकिस्तानी शिया नेताओं के मुताबिक ईरान युद्ध भड़कने के बाद प्रवासियों को निकालने की रफ्तार काफी तेज हो गई थी। विशेषकर उस समय जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यूएई के इलाकों पर मिसाइल और घातक ड्रोन से हमले शुरू किए थे। हालांकि इस छंटनी के सटीक मानकों की पुष्टि नहीं हुई है।
यूएई सरकार ने इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अभी तक कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने चौंकाने वाला रुख अपनाते हुए कहा कि यूएई ने यह एक्शन मजहब के आधार पर नहीं बल्कि केवल स्थानीय नियमों के उल्लंघन के कारण लिया है।
Author: Pallavi Sharma

