World News: दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना का भीषण सैन्य अभियान लगातार जारी है। नई रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सैनिकों ने सीमावर्ती लेबनानी गांवों में भारी तबाही मचाई है। कई गांवों को शक्तिशाली विस्फोटकों से पूरी तरह उड़ा दिया गया है। इन इलाकों में लगभग नब्बे प्रतिशत घर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं। इजरायल के इस कड़े कदम से लाखों लोग बेघर हो गए हैं। पूरे इलाके में भयानक तबाही का खौफनाक मंजर दिखाई दे रहा है।
इजरायली रक्षा मंत्री की कड़ी चेतावनी
इजरायल के रक्षा मंत्री ने इस व्यापक सैन्य कार्रवाई को सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा के पास स्थित लेबनान के सभी घरों को पूरी तरह नष्ट किया जाएगा। इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य उत्तरी इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जब तक इजरायल को पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, विस्थापितों को लौटने नहीं दिया जाएगा। लगभग छह लाख लेबनानी नागरिक अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुके हैं।
मानवाधिकार संस्था ने जारी की रिपोर्ट
मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस भारी तबाही पर एक विस्तृत और अहम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सैनिकों ने जानबूझकर आम नागरिकों की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। पिछले कुछ महीनों में दस हजार से अधिक नागरिक संरचनाएं पूरी तरह नष्ट कर दी गई हैं। सैनिकों ने घरों को गिराने के लिए विस्फोटकों और भारी बुलडोजर का इस्तेमाल किया है। संस्था ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का घोर उल्लंघन करार दिया है।
लेबनान में गाजा जैसी भयानक तबाही
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में पूरी तरह से गाजा मॉडल को ही अपनाया है। रफाह और बेत हनौन शहरों की तरह लेबनानी गांवों को मलबे के ढेर में बदला जा रहा है। सैन्य कार्रवाई में मस्जिदों, कब्रिस्तानों, सड़कों और सार्वजनिक पार्कों को भी बिल्कुल नहीं बख्शा गया है। स्थानीय लेबनानी निवासियों का कहना है कि उनके गांवों में अब कुछ भी नहीं बचा है। सभी प्रभावित इलाकों का बुनियादी ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।
विस्थापित लेबनानी नागरिकों का बुरा हाल
लेबनान के सभी सीमावर्ती गांव अब पूरी तरह से निर्जन और ‘घोस्ट टाउन’ बन चुके हैं। जो आम लोग जान बचाकर वहां से भागे थे, उनके पास वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं बचा है। इन गांवों की कृषि भूमि और बिजली-पानी की सभी बुनियादी सुविधाएं नष्ट हो गई हैं। इजरायली सेना की यह विनाशकारी सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस भारी तबाही पर लगातार गहरी चिंता व्यक्त कर रहा है। विस्थापित नागरिक राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
हथियारों के ठिकाने नष्ट करने का दावा
इजरायली सैन्य अधिकारियों ने लेबनान में हुए इस भारी विनाश का खुलकर बचाव किया है। इजरायली सेना का कड़ा दावा है कि हिजबुल्लाह इन गांवों में अपने खतरनाक हथियार छिपाता था। आम नागरिकों के घरों का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों और हमलों के लिए किया जा रहा था। इसी बड़े खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए सेना ने घरों को गिराया है। हालांकि, कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सेना के इन बड़े दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अंतरराष्ट्रीय युद्ध कानूनों का खुला उल्लंघन
अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों ने इजरायल की इस विध्वंसक कार्रवाई को युद्ध अपराध की गंभीर श्रेणी में रखा है। बिना किसी स्पष्ट सैन्य जरूरत के नागरिक संपत्तियों को नष्ट करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाता है। सामने आए कई वीडियो साक्ष्यों में इजरायली सैनिक खाली घरों में विस्फोटक लगाते हुए साफ नजर आ रहे हैं। इस भयानक तबाही ने मध्य पूर्व के संकट को बहुत खतरनाक मोड़ दे दिया है। भविष्य में उजड़े हुए इलाकों का पुनर्निर्माण एक बहुत बड़ी चुनौती होगी।
संघर्ष विराम के बाद भी जारी रही तबाही
कई अहम रिपोर्टों में दावा किया गया है कि संघर्ष विराम के बाद भी तबाही का यह सिलसिला नहीं थमा। जब इजरायली सेना के पास इलाके का पूरा नियंत्रण था, तब भी यह विनाश लगातार जारी रहा। कई इजरायली सैनिकों ने खाली घरों को उड़ाने के बाद जश्न मनाते हुए अपने वीडियो खुद रिकॉर्ड किए। इन अमानवीय कृत्यों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। युद्ध के इन गहरे घावों को भरने में कई दशक लग जाएंगे।


