राजस्थान में एबीएनपी की हिंदू जोड़ो यात्रा संपन्न, चुनावी शंखनाद के बीच छिड़ा बड़ा सियासी संग्राम

Rajasthan News: अर्जुन भारत नेशनल पार्टी (एबीएनपी) की डेढ़ महीने लंबी ‘हिंदू जोड़ो यात्रा’ शुक्रवार को जयपुर में समाप्त हो गई। यह पदयात्रा 29 मार्च 2026 को राजधानी से शुरू हुई थी। इस दौरान पार्टी ने राज्य के कई बड़े जिलों में भारी जनसंपर्क अभियान चलाया। समापन समारोह में नेताओं ने इसे ऐतिहासिक जनसमर्थन अभियान करार दिया।

एबीएनपी नेताओं के मुताबिक इस यात्रा ने जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, उदयपुर, बीकानेर और अलवर सहित अधिकांश क्षेत्रों को कवर किया। पार्टी का दावा है कि अभियान को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। स्थानीय युवाओं और नागरिकों ने भी इस यात्रा में बढ़-चढ़कर अपनी हिस्सेदारी दर्ज कराई।

राजस्थान के बाद अब देशव्यापी आंदोलन की तैयारी

पार्टी प्रवक्ता अंजलि जैन ने कहा कि राजस्थान की सफलता के बाद अब संगठन देशव्यापी स्तर पर ऐसी यात्राएं निकालेगा। इस यात्रा ने नेताओं को जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का शानदार अवसर दिया। राजस्थान से मिली बेहतरीन प्रतिक्रिया ने पूरे संगठन का आत्मविश्वास राष्ट्रीय स्तर पर काफी मजबूत किया है।

यात्रा के दौरान झीलों की नगरी उदयपुर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी पैदा हो गई थी। कुछ असामाजिक तत्वों ने यात्रा को रोकने और कार्यक्रम में बाधा डालने का प्रयास किया। हालांकि विपरीत परिस्थितियों के बाद भी कार्यकर्ताओं ने संयम बनाए रखा और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।

विराज जन पार्टी के साथ बढ़ता राजनीतिक टकराव

प्रवक्ता ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना कहा कि कुछ ताकतें संगठन की मजबूती से घबरा गई हैं। जब नए संगठन को लगातार जनसमर्थन मिलता है, तब विरोध होना स्वाभाविक है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को सीधे तौर पर विराज जन पार्टी (वीआरजेपी) पर तीखा हमला माना जा रहा है।

अजमेर में भी कुछ लोगों ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताते हुए कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी थी। इसके अलावा एबीएनपी ने विराज जन पार्टी के प्रशांत कुमार सैनी की उस नीति की कड़ी आलोचना की, जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए अनिवार्य प्रशासनिक प्रशिक्षण की बात कही गई है।

जनता का फैसला सर्वोपरि और चुनावी लक्ष्य

अंजलि जैन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय हमेशा जनता का ही होता है। इसलिए चुने गए प्रतिनिधियों की वैधता पर सवाल उठाना गलत है। राजनीतिक दलों को जनता के विवेक और उनके अंतिम फैसले पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। लोकतंत्र में मतदाताओं का सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए।

इस अभियान के जरिए एबीएनपी ने साल 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उतरने के साफ संकेत दे दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा से पार्टी को राज्य में एक नई वैचारिक पहचान मिली है। अब देखना होगा कि पार्टी आगामी चुनावों में इस जमीनी जुड़ाव का कैसे फायदा उठाती है।

Author: Manish Rathore

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