होर्मुज नाकेबंदी और परमाणु तनाव के बीच फंसा ईरान, जानें क्या बोले सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि

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World News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान जुबानी जंग काफी तेज हो गई है। भारत में ईरान के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अमेरिकी मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कथनी और करनी में भारी अंतर है। वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रखने की बात करता है। लेकिन उसने खुद वहां भारी नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। ईरान को शुरुआत से ही शांति वार्ता में अमेरिकी दावों पर शक है।

ताकत के दम पर मांगें मनवाना चाहता है वाशिंगटन

शिया समुदाय के कार्यक्रम ‘याद-ए-शुहदा’ में बात करते हुए इलाही ने अमेरिका पर बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन कूटनीति की आड़ में ईरान पर भारी दबाव डालना चाहता है। अमेरिकी नेता असल में किसी सार्थक बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। वे केवल ताकत के बल पर अपनी मांगें मनवाने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान हमेशा से पूरी दुनिया में शांति का माहौल चाहता है। तेहरान किसी भी तरह का विनाशकारी युद्ध बिल्कुल नहीं चाहता है।

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उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर बोला बड़ा हमला

दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर बेहद तीखा प्रहार किया है। वेंस ने फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में तेहरान पर आर्थिक आतंकवाद फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज में ईरानी जहाजों को पूरी तरह रोककर सही कदम उठा रहा है। वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक नीतियों का पूरी तरह से समर्थन किया है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि अमेरिका ईरान को कभी परमाणु हथियार बनाने नहीं देगा।

इस्लामाबाद में हुई कूटनीतिक बातचीत के क्या रहे नतीजे?

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में उच्च स्तरीय बैठक हुई है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस ऐतिहासिक बातचीत को एक बेहद सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की लंबी चर्चा में बहुत अच्छी प्रगति हुई है। अमेरिका ने अपनी शर्तें साफ कर दी हैं कि ईरान को अपना यूरेनियम संवर्धन तत्काल रोकना होगा। अब इस नाजुक मसले का पूरा भविष्य सीधे तौर पर ईरानी सरकार के अगले कदम पर निर्भर है।

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