अंटार्कटिका में पिघल रही बर्फ लाएगी प्रलय, मुंबई समेत दुनिया के कई शहर हो जाएंगे जलमग्न

Weather News: अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे एक ऐसा भयानक बदलाव हो रहा है, जो पूरी मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। एक नए शोध के अनुसार वहां का गहरा समुद्र तेजी से गर्म हो रहा है। इसके कारण विशाल ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं। इससे समुद्र का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट काफी डराने वाली है। अंटार्कटिका के ग्लेशियर अगर पूरी तरह से पिघल गए, तो समुद्र का जल स्तर लगभग 58 मीटर तक बढ़ सकता है। ऐसा होने पर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित दुनिया के कई बड़े शहर डूब जाएंगे। इनमें न्यूयॉर्क, टोक्यो और लंदन जैसे प्रमुख शहर भी पूरी तरह शामिल हैं।

समुद्र में बिगड़ रहा तापमान का संतुलन

कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट जर्नल की हालिया रिपोर्ट ने खतरे की घंटी बजा दी है। अंटार्कटिका के गहरे पानी में गर्म लहरें काफी तेजी से फैल रही हैं। हमारे समुद्र ग्लोबल वार्मिंग की 90 फीसदी गर्मी सोख लेते हैं। यही अतिरिक्त गर्मी अब बर्फ की मजबूत सुरक्षा दीवारों को लगातार कमजोर कर रही है।

अब वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा डर अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन या एएमओसी को लेकर सता रहा है। यह समुद्र के भीतर बहने वाली एक विशाल जलधारा प्रणाली है। यह पूरे विश्व के तापमान को सही ढंग से संतुलित रखती है। लेकिन बर्फ के लगातार पिघलने से यह प्रणाली बहुत अधिक कमजोर पड़ती जा रही है।

ध्रुवों का ठंडा और नमकीन पानी भारी होता है और यह गहराई में बैठ जाता है। फिर यह गर्म इलाकों की तरफ जाकर वहां के पानी को ऊपर भेजता है। अब ग्लेशियरों के पिघलने से भारी मात्रा में मीठा पानी समुद्र में मिल रहा है। यह मीठा पानी काफी हल्का होता है और नीचे नहीं बैठता है।

यूरोप में भीषण सर्दी और मानसून पर असर

इस बदलाव से समुद्र की प्राकृतिक धाराएं बहुत ज्यादा धीमी पड़ रही हैं। अगर यह समुद्री चक्र पूरी तरह रुक गया, तो गर्म पानी यूरोप तक नहीं पहुंचेगा। इससे ब्रिटेन और यूरोप के कुछ हिस्सों में सर्दियों का तापमान 15 डिग्री तक गिर जाएगा। इसका सीधा असर दुनिया भर के बदलते मौसम पर पड़ेगा।

ट्रॉपिकल रेन बेल्ट खिसकने से भारत और अफ्रीका में बारिश कराने वाला मानसून भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। यह भारत के लिए भी एक सीधा और बड़ा खतरा है। मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसार पिछले दो दशकों में अरब सागर के तापमान में भी 1.4 डिग्री की बड़ी बढ़ोत्तरी साफ दर्ज की गई है।

समुद्र के बढ़ते तापमान से भारत के तटीय इलाकों में भी भारी खतरा मंडरा रहा है। अरब सागर के गर्म होने से अब तूफानों की संख्या में पचास फीसदी तक की भारी वृद्धि हो चुकी है। इसके अलावा इन तूफानों की तीव्रता भी बहुत अधिक बढ़ गई है। यह गंभीर स्थिति तटीय राज्यों के लिए एक बड़ा संकट है।

Author: Shilla Bhatia

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