Delhi News: भारतीय हाईवे पर सफर करने वाले स्मार्टफोन यूजर्स को लेकर एक बेहद हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। देश के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले हर दस में से लगभग आठ स्मार्टफोन यूजर्स नेटवर्क की भारी किल्लत या कॉल ड्रॉप की समस्या से बुरी तरह जूझ रहे हैं।
वर्किंग प्रोफेशनल्स को हो रहा है मानसिक और आर्थिक नुकसान
न्यूज एजेंसी आईएएनएस (IANS) के मुताबिक, साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) की ताजा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। यह सर्वे नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों के करीब दो हजार स्मार्टफोन यूजर्स पर किया गया है। इसमें शामिल लोगों की उम्र अठारह से पैंतीस साल के बीच है।
सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि नेटवर्क की यह लगातार होने वाली रुकावट कामकाजी पेशेवरों को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से कमजोर कर रही है। सीएमआर के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप के वीपी प्रभु राम ने कहा कि भारत ने मोबाइल कवरेज बढ़ाने में बेहतरीन प्रगति की है।
रोजमर्रा के सफर में लगातार कनेक्टिविटी मिलना आज भी बड़ी चुनौती
प्रभु राम के अनुसार इसके बावजूद हाईवे, मेट्रो और इनडोर लो-सिग्नल वाले इलाकों में लगातार कनेक्टिविटी मिलना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बिजनेस के लिए फोन का इस्तेमाल करने वाले करीब चौंसठ प्रतिशत लोगों ने माना कि कॉल ड्रॉप से उनकी कई बड़ी डील्स हाथ से निकल गईं।
इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तीन में से दो लोगों ने कमजोर सिग्नल परफॉर्मेंस की वजह से अपने अहम क्लाइंट्स को हमेशा के लिए खो दिया। लगभग तिरासी प्रतिशत लोगों का कहना था कि जरूरी बातचीत के दौरान कॉल कटने से वे बेहद बेबस महसूस करते हैं।
फोन बदलने से कनेक्टिविटी में सुधार का दावा
करीब इकहत्तर प्रतिशत उपभोक्ताओं को कॉल ड्रॉप होने के बाद ग्राहकों को दोबारा फोन मिलाना पड़ता है। इससे बाजार में उनकी प्रोफेशनल इमेज को गहरा नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट के अनुसार सफर के दौरान स्मार्टफोन का खास डिजाइन कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में बहुत अहम भूमिका निभा सकता है।
हाईवे पर ट्रिपल-सिग्नल चिपसेट टेक्नोलॉजी वाले स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले इक्यासी प्रतिशत यूजर्स ने माना कि नया डिवाइस लेने के बाद उनका सिग्नल एक्सपीरियंस काफी सुधरा है। वहीं करीब चौहत्तर प्रतिशत लोगों ने हाईवे ट्रैवल के दौरान ज्यादा रिलायबल कॉलिंग का अनुभव साझा किया है।
स्मार्टफोन मार्केट के प्रदर्शन में दर्ज की गई गिरावट
सीएमआर की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय स्मार्टफोन मार्केट ने हाल के सालों में अपना सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया है। ड्रैम (DRAM) और नैंड (NAND) फ्लैश मेमोरी की बढ़ती कीमतों के कारण साल 2026 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट्स में सालाना आधार पर दो प्रतिशत की गिरावट आई है।
मेमोरी की वैश्विक कीमतों में इस भारी उछाल की वजह से मोबाइल कंपनियों को अपने नए डिवाइसेज के दाम अचानक बढ़ाने पड़े हैं। इस बड़ी वजह ने कई बजट-सेंसिटिव भारतीय ग्राहकों को अपना पुराना फोन अपग्रेड करने का फैसला आगे टालने पर पूरी तरह मजबूर कर दिया है।
Rajesh Kumar


