Uttarakhand News: मानसून सीजन की दस्तक के साथ ही रामनगर की कोसी और दाबका नदी में सात महीने से चल रहा खनन कार्य पूरी तरह बंद हो गया है। इस वित्तीय वर्ष में यहां से सरकार को बंपर कमाई हुई है। प्रशासन को कुल 9,79,19,791 रुपये का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त हुआ है।
पिछले साल के मुकाबले राजस्व में 46 फीसदी का बड़ा उछाल
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अधीन आने वाली इन नदियों से उपखनिज निकासी का काम वन विकास निगम संभालता है। वन प्रभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बार राजस्व में पिछले साल की तुलना में 46 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो एक बड़ा रिकॉर्ड है।
रामनगर में कोसी नदी के पांच गेटों और दाबका नदी के छोई गेट से खनन का संचालन होता है। आमतौर पर 31 मई को बंद होने वाला खनन इस बार 19 जून तक चला। पिछले सत्र में जहां करीब 4.54 करोड़ रुपये की आय हुई थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 9.79 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
10 लाख घनमीटर से ज्यादा उपखनिज की हुई रिकॉर्ड निकासी
इस पूरे सीजन में दोनों नदियों से कुल 10,87,997 घनमीटर उपखनिज की निकासी की गई। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कोसी नदी का रहा, जहां से 9,59,626 घनमीटर माल निकाला गया। वहीं दूसरी ओर दाबका नदी से भी 1,28,371 घनमीटर उपखनिज का उठान किया गया। यह काम पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुआ था।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या ने बताया कि इस बार राजस्व में पांच करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त लाभ मिला है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अधिकारियों की मुस्तैदी, रात में औचक गश्त, गेटों पर सख्त चेकिंग और अवैध खनन के खिलाफ चलाए गए निरंतर अभियान को दिया है।
Author: Harish Rawat


