गंगा एक्सप्रेसवे: बढ़ते हादसों के बाद प्रशासन अलर्ट, बदायूं में बनेगा ट्रामा सेंटर और सीएचसी में आरक्षित होंगे बेड

Uttar Pradesh News: गंगा एक्सप्रेसवे पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं ने जिला प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। संचालन शुरू होने के बाद से हो रहे लगातार हादसों को देखते हुए अब स्वास्थ्य और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। बदायूं जिला प्रशासन ने एक्सप्रेसवे के किनारे एक अत्याधुनिक ट्रामा सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के सलाहकार के माध्यम से शासन तक भेज दिया गया है, ताकि घायलों को तत्काल इलाज मिल सके।

92 किलोमीटर का दायरा और बढ़ती चुनौतियां

गंगा एक्सप्रेसवे का लगभग 92 किलोमीटर लंबा हिस्सा अकेले बदायूं जिले से होकर गुजरता है। एक्सप्रेसवे पर यातायात शुरू होने के बाद से तेज रफ्तार और चालकों को झपकी आने के कारण हादसों में बढ़ोत्तरी हुई है। टायर फटने और वाहन पलटने जैसी घटनाओं में अब तक कई लोग घायल हो चुके हैं और एक व्यक्ति की जान भी जा चुकी है। भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए प्रशासन पहले से ही पुख्ता इंतजाम करने में जुटा है।

तीन सीएचसी में पांच-पांच बेड आरक्षित

जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने एक्सप्रेसवे के निकट स्थित तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को अलर्ट मोड पर रखा है। वजीरगंज, दातागंज और घटपुर सीएचसी में विशेष रूप से पांच-पांच बेड आरक्षित किए गए हैं। इन केंद्रों पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अलग टीमें तैनात रहेंगी। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं सक्रिय रखी जाएं और एंबुलेंस को हाई अलर्ट पर रखा जाए।

पुलिस पेट्रोलिंग और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग ने भी कमर कस ली है। एक्सप्रेसवे पर वर्तमान में नौ पुलिस वाहन लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। जिन स्थानों पर अभी तक फेंसिंग (तारों की बाड़) का काम अधूरा है, वहां विशेष पुलिस टीमें तैनात की गई हैं। प्रशासन का मानना है कि खुले स्थानों से मवेशियों या ग्रामीणों के अचानक आने से भी बड़े हादसे हो सकते हैं, जिन्हें रोकने के लिए एंबुलेंस और पुलिस बल को सूचना मिलते ही तत्काल पहुंचने के निर्देश हैं।

‘गोल्डन आवर’ में इलाज बचाने की कोशिश

मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी के समक्ष भी ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया है। अधिकारियों का तर्क है कि ट्रामा सेंटर बनने से दुर्घटना के शिकार लोगों को ‘गोल्डन आवर’ (हादसे के ठीक बाद का कीमती समय) में विशेषज्ञ उपचार मिल सकेगा। इससे गंभीर रूप से घायल मरीजों की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। वर्तमान में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है।

वाहन चालकों से सुरक्षित सफर की अपील

प्रशासन ने एक्सप्रेसवे का उपयोग करने वाले वाहन चालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें निर्धारित गति सीमा का पालन करने और थकान होने पर वाहन न चलाने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों का पालन ही हादसों को रोकने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है। गंगा एक्सप्रेसवे को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी और चिकित्सकीय दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।

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