टीएमसी में महासंग्राम! करोड़ों के फंड पर छिड़ी जंग, कोर्ट परिसर में दिग्गज नेता पर हुई अंडों की बौछार

West Bengal News: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी नेतृत्व विवाद अब पार्टी के करोड़ों रुपये के बैंक खातों तक पहुंच गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरूप बिश्वास ने बैंक को पत्र लिखकर तृणमूल के खातों के संचालन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

अरूप बिश्वास ने खुद को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताते हुए बैंक से अपील की है कि जब तक विवाद पूरी तरह नहीं सुलझता, तब तक खातों से किसी भी तरह की निकासी न की जाए। सोशल मीडिया पर यह पत्र काफी वायरल हो रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस वायरल पत्र के अनुसार, पार्टी के भीतर कई अलग-अलग गुट खुद को असली और वैध पदाधिकारी बता रहे हैं। ऐसे में यह साफ नहीं है कि बैंक खातों को संभालने का असली अधिकार किसके पास है। अरूप ने आशंका जताई है कि कुछ अनधिकृत लोग पार्टी फंड का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

बागी विधायकों और सांसदों ने बढ़ाई पार्टी की मुश्किलें

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल के 58 विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया। इस बागी गुट को विधानसभा अध्यक्ष से भी मान्यता मिल चुकी है। इसके साथ ही ऋतब्रत को विपक्ष का नया नेता भी चुन लिया गया है।

सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि संसद में भी तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के करीब 20 बागी सांसदों ने खुद को मूल नेतृत्व से पूरी तरह अलग कर लिया है। इन सभी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपने विलय की आधिकारिक घोषणा भी कर दी है।

इस बड़े सियासी संकट के बीच बागी खेमे के विधायक कन्हैयालाल अग्रवाल ने अरूप बिश्वास का समर्थन किया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि अगर पार्टी के कोषाध्यक्ष को करोड़ों रुपये के फंड के दुरुपयोग की आशंका है, तो बैंक खातों पर रोक लगवाना उनका कानूनी अधिकार है।

पार्टी खाते में जमा हैं 675 करोड़ रुपये

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा में तृणमूल का यह मुख्य खाता संचालित है। चुनाव आयोग को सौंपे गए ऑडिट दस्तावेजों के अनुसार, इस बैंक खाते में लगभग 675 करोड़ रुपये जमा हैं, जिसे लेकर अब दोनों गुटों में खींचतान शुरू हो गई है।

संगठन में हुए हालिया बदलावों के तहत शुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। शुभाशीष ने इस विवाद पर कहा कि उन्हें पत्र की जानकारी नहीं है। वह राज्य संगठन के कोषाध्यक्ष हैं, जबकि अरूप बिश्वास अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पद पर थे।

लियोन मेसी मामले में अरूप बिश्वास से लंबी पूछताछ

दूसरी ओर, साल्टलेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबालर लियोन मेसी के कार्यक्रम में हुई भारी अव्यवस्था के मामले में भी अरूप बिश्वास घिर गए हैं। तीन बार नोटिस मिलने के बाद पूर्व खेल मंत्री आखिरकार बिधाननगर दक्षिण थाने में पुलिस के सामने पेश हुए।

पुलिस अधिकारियों ने अरूप बिश्वास से थाने में करीब साढ़े तीन घंटे तक गहन पूछताछ की। पुलिस ने उन्हें आगामी 22 जून को दोबारा जरूरी दस्तावेजों के साथ तलब किया है। थाने से बाहर निकलने के बाद अरूप ने कहा कि वह इस मामले में जो भी कहेंगे, सीधे अदालत में कहेंगे।

थाने से निकलने के बाद अरूप बिश्वास अलीपुर अदालत परिसर में अपने वकील के कमरे में पहुंचे। वहां मौजूद वकीलों और आम लोगों ने उन्हें घेरकर जमकर नारेबाजी की। जब वह भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अपनी कार की तरफ बढ़े, तब उग्र भीड़ ने उन पर अंडों की जोरदार बौछार कर दी।

Author: Sourav Banerjee

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