Sheopur News: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में भारत के महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट को लेकर एक बेहद चिंताजनक हकीकत सामने आई है। देश में 70 साल बाद चीतों को दोबारा बसाने के लिए कूनो में करोड़ों रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक वन्यजीव अस्पताल बनाया गया था। इसका मकसद बीमार या घायल चीतों को तुरंत इलाज देना था।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिछले साढ़े तीन साल में यह अस्पताल सिर्फ एक नवजात शावक ‘मुखी’ की जान ही बचा सका है। आपातकालीन स्थिति में कूनो का यह आधुनिक मेडिकल ढांचा पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है। हाल ही में मुरैना के पहाड़गढ़ इलाके में गंभीर रूप से घायल मिली चीता ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया।
इस ताजा घटना के बाद कूनो में चीतों की हाईटेक निगरानी और उनके इलाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी आंकड़ों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, कूनो नेशनल पार्क और उसके आसपास के जंगलों में आपसी संघर्ष, गंभीर चोटों और विभिन्न बीमारियों के कारण अब तक कुल 23 चीतों और उनके शावकों की मौत हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के मेडिकल सेटअप का सच
राष्ट्रीय महत्व के इस प्रोजेक्ट के तहत कूनो के पालपुर इलाके में एक विशेष वाइल्ड चीता मेडिकल सेटअप तैयार किया गया था। इस अस्पताल में चीता को अलग बाड़े में रखकर 24 घंटे सीसीटीवी से मॉनिटर करने की सुविधा है। यहां डिहाइड्रेशन और गंभीर इन्फेक्शन की स्थिति में इमरजेंसी ड्रिप और जीवन रक्षक दवाओं का पूरा इंतजाम है।
इसके अलावा अस्पताल में स्पेशल वाइल्ड लाइफ मेडिकल इक्विपमेंट, ट्रेंक्यूलाइजर गन, एडवांस ब्लड टेस्ट लैब, अल्ट्रासाउंड, जीपीएस ट्रैकिंग, मोबाइल आईसीयू और एक्स-रे जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। नामीबिया और साउथ अफ्रीका की वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट टीमें भी वीडियो कॉल पर हर समय कंसल्टेशन के लिए उपलब्ध रहती हैं। इन दावों के बावजूद चीतों की अकाल मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा है।
निगरानी के दावों के बीच लेटलतीफी बनी काल
कूनो वन प्रबंधन लगातार दावा करता रहा है कि चीतों की सुरक्षा के लिए सैटेलाइट कॉलर आईडी, सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है। वन्यकर्मियों की टीम भी चौबीसों घंटे चीतों के पीछे तैनात रहती है। लेकिन हकीकत यह है कि जब भी कोई चीता या शावक किसी हिंसक हमले में घायल हुआ, टीम को उसकी जानकारी अगले दिन ही मिली।
जंगल में आपसी संघर्ष और हमलों में गंवाई जान
कूनो के जंगलों में आपसी वर्चस्व और हिंसक वन्यजीवों के घातक हमलों के कारण कई चीतों की दर्दनाक मौत हुई है:
- दक्षा (9 मई 2023): मेटिंग के दौरान अन्य चीतों के साथ हुए हिंसक संघर्ष में घायल होने से मौत हुई।
- तेजस (11 जुलाई 2023): आपसी लड़ाई में गंभीर रूप से चोटिल होने के कारण दम तोड़ा।
- सूरज (14 जुलाई 2023): जंगल में हिंसक संघर्ष के दौरान शरीर पर गहरे घाव होने से मौत हुई।
- चीता निर्वा के 2 शावक (28 नवंबर 2024): जन्म के महज पांच दिन बाद दोनों शावक जंगल में मृत पाए गए।
- गामिनी का शावक (5 अगस्त 2025): रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर होने के कारण इलाज के दौरान दम तोड़ा।
- चीता केजीपी 12 के 4 शावक (12 मई 2026): कूनो के घने जंगल में इनके क्षत-विक्षत शव बरामद हुए।
- चीता केजीपी 11 (6 जून 2026): पहाड़गढ़ में गंभीर रूप से घायल मिलने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई।
बीमारी और भीषण डिहाइड्रेशन ने भी ली जान
कूनो का मौसम और गंभीर बीमारियां भी विदेशी चीतों के लिए जानलेवा साबित हुई हैं। मार्च 2023 में मादा चीता साशा की किडनी की पुरानी बीमारी के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद 23 मई 2023 को भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन के चलते चीता ज्वाला के तीन नवजात शावकों ने दम तोड़ दिया था।
इसके अलावा 23 अप्रैल 2023 को चीता उदय की कार्डियक अरेस्ट यानी दिल का दौरा पड़ने से अचानक मौत हो गई थी। वहीं संक्रमण की वजह से 2 अगस्त 2023 को चीता धात्री और कमजोरी के कारण 16 जनवरी 2024 को चीता शौर्य की जान चली गई। 27 अगस्त 2024 को नर चीता पवन की नाले में डूबने से मौत हो गई थी।
Rashmi Sharma


