Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में चर्चित चेस्टर हिल्स भूमि खरीद घोटाले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की एक विशेष टीम ने मामले की जांच के लिए सोलन में डेरा डाल दिया है। यह टीम इस पूरे मामले के राजस्व रिकॉर्ड की गहराई से जांच कर रही है। इस बेनामी संपत्ति और जमीन खरीद फरोख्त मामले में जल्द कई बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। जांच अधिकारियों ने अपना काम शुरू कर दिया है।
राजस्व रिकॉर्ड खंगाल रही है विशेष टीम
महालेखा परीक्षक की विशेष टीम केवल चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट तक ही सीमित नहीं रहेगी। अधिकारी सोलन जिले में हुए अन्य बड़े भूमि सौदों की भी बारीकी से जांच करेंगे। उप-मंडलाधिकारी की ओर से पहले सौंपी गई रिपोर्ट का बहुत गहन अध्ययन किया जाएगा। टीम इस घोटाले की तह तक जाने का पूरा प्रयास कर रही है। सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को कब्जे में लेने की प्रक्रिया चल रही है।
धारा 118 के उल्लंघन का आरोप
यह विवाद हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एक्ट की धारा 118 के कथित उल्लंघन से जुड़ा है। आरोप है कि करीब 275 बीघा जमीन एक स्थानीय किसान के नाम पर खरीदी गई। उस किसान की इतनी जमीन खरीदने की कोई आर्थिक हैसियत नहीं थी। असल में इस प्रोजेक्ट का काम और पैसा बाहरी राज्यों के बिल्डरों का लगा हुआ है। जांच में इस बेनामी सौदे की कई परतें खुल रही हैं।
मुख्य सचिव और रेरा की अहम भूमिका
हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी शिकायतों के आधार पर जांच कर रही है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने एसडीएम की रिपोर्ट को नियमों के खिलाफ बताया था। उन्होंने कार्रवाई न होने पर जिला उपायुक्त को पत्र लिखा था। अब महालेखा परीक्षक की टीम राजस्व नियमों के उल्लंघन पर फोकस कर रही है। प्रशासन के कई अधिकारी भी इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में आ गए हैं।
प्रशासनिक जांच का दायरा बढ़ने की उम्मीद
फिलहाल महालेखाकार परीक्षक की टीम राजस्व रिकॉर्ड जांचने का काम बहुत तेजी से कर रही है। अधिकारियों का मुख्य लक्ष्य चेस्टर हिल्स मामले से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों को प्राप्त करना है। अगर जांच में कुछ बड़ी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जिला उपायुक्त कार्यालय स्तर पर प्रशासनिक जांच का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है। राज्य सरकार इस मामले में किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरतना चाहती है।
चार लोगों को जारी हुए कारण बताओ नोटिस
इस विवाद में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है। सोलन के उपायुक्त ने एक कृषक दंपती और दो बिल्डरों सहित चार लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इन सभी को तेईस अप्रैल को उपायुक्त की अदालत में पेश होकर अपना जवाब दाखिल करना होगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन ने मामले में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
विपक्ष कर रहा निष्पक्ष जांच की मांग
इस भूमि घोटाले को लेकर राज्य में सियासी पारा काफी चढ़ गया है। विपक्षी दल मामले की निष्पक्ष जांच की लगातार मांग कर रहे हैं। नेताओं का कहना है कि प्रदेश में जमीनी कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाहरी बिल्डर स्थानीय लोगों को मोहरा बनाकर कीमती जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। विपक्ष ने सरकार को सख्त चेतावनी दी है कि सभी दोषियों को जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए।
सरकार कर सकती है जमीन को अपने अधीन
राज्य सरकार ने इस पूरे मामले में बहुत सख्त रुख अपना लिया है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि धारा 118 का उल्लंघन हुआ है, तो नियमों के तहत सरकार संपत्ति को अपने अधीन कर सकती है। हिमाचल प्रदेश में बाहरी लोगों के जमीन खरीदने को लेकर कड़े कानून बनाए गए हैं। इस कड़ी कार्रवाई से अन्य बाहरी बिल्डरों में भी एक सख्त संदेश जाएगा।
कानूनी पचड़े में फंस सकता है पूरा प्रोजेक्ट
चेस्टर हिल्स का यह प्रोजेक्ट अब पूरी तरह से कानूनी पचड़े में फंसता हुआ नजर आ रहा है। रेरा और सीएजी की संयुक्त जांच के बाद मामले की रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। अगर नियमों की अनदेखी साबित होती है, तो इस पूरे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य भी लंबे समय तक रुक सकता है। इससे उन लोगों की चिंता भी बढ़ गई है, जिन्होंने यहां अपने फ्लैट बुक करवाए थे।


