पति ने छोड़ा, ससुराल ने मोड़ा मुंह; फिर बेसहारा मां ने कैसे पलट दी किस्मत? रोंगटे खड़े कर देगी यह कहानी

Himachal News: शिमला के कृष्णानगर की जसबीर कौर की कहानी हर इंसान के लिए एक मिसाल है। शादी के चार साल बाद पति उन्हें बेसहारा छोड़कर जर्मनी चले गए। उस वक्त उनका एक बेटा बहुत छोटा था और दूसरा गर्भ में था। ससुराल पक्ष ने भी उनका साथ छोड़ दिया। इसके बावजूद जसबीर ने बिल्कुल हार नहीं मानी। मुश्किल हालातों से डटकर लड़ते हुए उन्होंने अपने दोनों बेटों का शानदार भविष्य बनाया। आज वह समाज की बेसहारा महिलाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद बन चुकी हैं।

घर-घर जाकर कपड़े बेचे और बच्चों को पढ़ाया

साल उन्नीस सौ छिहत्तर में जसबीर कौर की शादी बड़े अरमानों के साथ हुई थी। पति के विदेश जाने के बाद उनके जीवन में केवल अंधेरा बचा था। घर चलाने और बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए उन्होंने घर-घर जाकर कपड़े बेचना शुरू किया। भारी आर्थिक तंगी और कड़वी चुनौतियों के बीच भी उन्होंने बेटों की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया। कुछ सालों की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें शिमला में एक क्राफ्ट टीचर की नौकरी मिल गई।

दोनों बेटों ने पाई सफलता, मां का सपना हुआ पूरा

नौकरी मिलने के बाद जसबीर कौर के परिवार की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी। उनकी बरसों की मेहनत और कड़े संघर्ष का सुखद परिणाम आज सबके सामने है। उनका एक बेटा अब बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर उनका भविष्य संवार रहा है। वहीं उनका दूसरा बेटा खुद की एक सफल कंपनी चला रहा है। मां के लिए इससे बड़ी खुशी और कोई नहीं हो सकती। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।

अब एनजीओ से जुड़कर कर रहीं समाज सेवा

अपने परिवार को सफलता के शिखर पर पहुंचाने के बाद जसबीर कौर अब समाजसेवा में काफी सक्रिय हैं। वे ‘पहचान’ नाम की एक गैर सरकारी संस्था में सचिव के पद पर अपनी अहम सेवाएं दे रही हैं। इस संस्था के जरिए वे कई जरूरतमंद महिलाओं की लगातार मदद कर रही हैं। इसके अलावा वह सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में भी हिस्सा लेती हैं। उनकी यह कहानी हजारों महिलाओं को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

यादें आज भी कर देती हैं आंखें नम

कठिन संघर्षों को पार कर चुकीं जसबीर कौर आज भी पुरानी बातों को याद करके भावुक हो जाती हैं। उनका कहना है कि एक मां की हिम्मत खराब हालातों से कहीं ज्यादा बड़ी होती है। जब वह अपने बच्चों को पूरी तरह से आत्मनिर्भर देखती हैं, तो उन्हें बहुत सुकून मिलता है। वह अक्सर सवाल उठाती हैं कि शादी के बाद बिना किसी कसूर के महिला को क्यों छोड़ दिया जाता है। उन्होंने समाज को नई दिशा दिखाई है।

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