Himachal Pradesh: क्या कमलेश कुमार पंत संभाल पाएंगे नए मुख्य सचिव की कुर्सी, जानें मानसून से पहले क्या है बड़ी चुनौती?

Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कमलेश कुमार पंत को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। सरकार ने उन्हें प्रदेश के मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार दिया है। संजय गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया। पंत ने सोमवार को सचिवालय पहुंचकर अपना कार्यभार संभाल लिया है।

कमलेश कुमार पंत 1993 बैच के अनुभवी आईएएस अधिकारी हैं। वह वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) और वित्त आयुक्त समेत कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे हैं। अब वे अपने पुराने विभागों के साथ-साथ मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से संभालेंगे।

प्रशासन को जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाना पहली प्राथमिकता

पदभार संभालने के बाद नए मुख्य सचिव ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं को तेजी से लागू किया जाएगा, जिससे आम जनता को समय पर सरकारी सेवाओं का सीधा लाभ मिल सके।

मुख्य सचिव पंत ने कहा कि वे राज्य के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुलभ बनाएंगे। जनता की समस्याओं का तुरंत समाधान करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। सरकार लगातार नई नीतियां बना रही है। प्रशासन अब इन योजनाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाएगा।

आईआईटी कानपुर के छात्र रहे हैं केके पंत

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी केके पंत मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से बीटेक की डिग्री ली है। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में आकर देश और राज्य के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं।

वे नई दिल्ली में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने एनएचएआई में मुख्य सतर्कता अधिकारी और संयुक्त सचिव (रक्षा उत्पादन) के रूप में काम किया है। हिमाचल प्रदेश में वे कांगड़ा के जिलाधीश समेत कई अहम पदों पर रहे हैं।

मानसून और आपदा प्रबंधन पर रहेगा विशेष फोकस

आगामी मानसून सीजन को देखते हुए मुख्य सचिव ने विशेष तैयारियों की बात कही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में हिमाचल ने भारी तबाही झेली है। आपदा से निपटने के लिए प्री-मानसून बैठकें शुरू हो चुकी हैं। प्रशासन ने नुकसान को कम करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई है।

उन्होंने बताया कि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाया गया है। किसी भी आपदा के समय तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जाएगा। इस बार प्रशासन का पूरा ध्यान प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाने का है।

अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करेगी सरकार

मुख्य सचिव के अनुसार राज्य में अर्ली वार्निंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। आपदा की पहले जानकारी देने वाले आधुनिक उपकरणों और सेंसर को लगाया जा रहा है। इससे संभावित खतरे की सटीक सूचना समय रहते प्रशासन और आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकेगी।

इस आधुनिक सूचना तंत्र को विकसित करने के लिए विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक मदद कर रहे हैं। बाहरी एजेंसियों के सहयोग से चल रही इन परियोजनाओं में अच्छी प्रगति हुई है। आधुनिक तकनीक और बेहतर तालमेल से राज्य में आपदा के जोखिम को काफी हद तक कम किया जाएगा।

Author: Sunita Gupta

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