Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नीली क्रांति ने एक नया इतिहास रच दिया है। मत्स्य पालन विभाग के शानदार वैज्ञानिक प्रबंधन से राज्य के जलाशयों में मछली उत्पादन में भारी उछाल आया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के नए आंकड़ों ने सफलता की नई कहानी लिखी है। इस रिकॉर्ड उत्पादन ने प्रदेश के छह हजार से अधिक मछुआरों की आजीविका को पूरी तरह से बदल दिया है। मत्स्य बीज संचयन और कड़ी निगरानी से यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल हुआ है।
तीन साल में उत्पादन ने तोड़े पिछले सभी रिकॉर्ड
राज्य के प्रमुख जलाशयों में पिछले तीन वर्षों के दौरान उत्पादन का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। वर्ष 2022-23 में मछली उत्पादन महज 549.35 मीट्रिक टन दर्ज किया गया था। अब यह आंकड़ा जबरदस्त वृद्धि के साथ 818.02 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। इन तीन सालों में कुल 268.67 मीट्रिक टन की शानदार बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों ने इसे विभाग की वैज्ञानिक तकनीकों और जलाशयों के बेहतरीन प्रबंधन का सीधा परिणाम बताया है।
गोबिंद सागर और पौंग डैम बने सफलता के मुख्य केंद्र
बिलासपुर जिले का गोबिंद सागर जलाशय इस सफलता का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां उत्पादन 191.22 से बढ़कर सीधे 404 मीट्रिक टन हो गया है। इस जलाशय में सिल्वर कार्प, रोहू और कतला प्रजातियों की भारी पैदावार हो रही है। दूसरी तरफ पौंग डैम 314.84 मीट्रिक टन के साथ दूसरे नंबर पर है। यहां कैट फिश का अधिक उत्पादन हुआ है। इसके अलावा रणजीत सागर, कोल डैम और चमेरा ने भी अच्छा योगदान दिया है।
गोल्डन महाशीर का संरक्षण और सख्त हुई निगरानी
राज्य सरकार ने पहली बार राजकीय मछली गोल्डन महाशीर के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया है। गोबिंद सागर और पौंग जलाशय में हजारों की संख्या में इसके बीज डाले गए हैं। विभाग ने प्रजनन के समय मछली पकड़ने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। अवैध शिकार रोकने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है। नावों और सड़कों के माध्यम से लगातार गश्त हो रही है। छोटी मछलियों का शिकार करने वालों पर भारी जुर्माना लगा है।
मछुआरों की आय बढ़ी, आधुनिक सुविधाओं की तैयारी
मछली उत्पादन में आई इस बड़ी क्रांति का सीधा फायदा चार जिलों के मछुआरों को मिला है। बिलासपुर, ऊना, कांगड़ा और चंबा के मछुआरा परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत हुई है। मत्स्य विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने आगामी योजनाओं की जानकारी दी है। विभाग अब लैंडिंग सेंटरों का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है। मत्स्य सहकारी सभाओं को ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर रोजगार और आमदनी मिल सके।


